ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद: 7 करोड़ की गाड़ियों को सजाने में फूंक दिए 5 करोड़, अब सरकार ने बिठाई जांच

ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद: 7 करोड़ की गाड़ियों को सजाने में फूंक दिए 5 करोड़, अब सरकार ने बिठाई जांच. ओडिशा के वन विभाग में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। विभाग द्वारा खरीदी गई 51 महिंद्रा थार (Mahindra Thar) गाड़ियों के कस्टमाइजेशन पर हुए भारी-भरकम खर्च ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। आलम यह है कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की ‘स्पेशल ऑडिट’ के आदेश दे दिए हैं।
7.1 करोड़ की गाड़ियाँ और 5 करोड़ का ‘मेकओवर’
ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद:पूरा मामला पिछले साल नवंबर का है, जब ओडिशा के वन और पर्यावरण विभाग ने फील्ड स्टाफ के लिए 51 महिंद्रा थार गाड़ियाँ खरीदी थीं। इन गाड़ियों की मूल कीमत करीब 7.1 करोड़ रुपये थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन ‘ऑल-टेरेन व्हीकल्स’ (ATV) को कस्टमाइज करने यानी उनमें अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ने के नाम पर 5 करोड़ रुपये और खर्च कर दिए गए।
स्पेशल ऑडिट टीम करेगी ‘दूध का दूध और पानी का पानी’
ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद:मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीसीसीएफ (वन्यजीव) कार्यालय के इस खर्च की जांच ओडिशा की स्पेशल ऑडिट टीम द्वारा की जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या इतनी बड़ी रकम खर्च करने के लिए उचित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
जांच के घेरे में हैं ये मुख्य बिंदु:
ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद:स्पेशल ऑडिट के दौरान टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी:
वित्तीय मंजूरी: क्या 5 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए राज्य के वित्त विभाग (Finance Department) से अनुमति ली गई थी?
प्रक्रिया का पालन: क्या कस्टमाइजेशन के लिए टेंडर और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन हुआ?
जरूरत या फिजूलखर्ची: क्या थार में लगाए गए 21 अतिरिक्त आइटम्स वास्तव में जरूरी थे?
बाहरी एजेंसी की भूमिका: क्या इस पूरी डील में किसी बाहरी बिचौलिए या एजेंसी को फायदा पहुँचाया गया?
आखिर थार में क्या बदलाव किए गए थे?
ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद:सूत्रों के मुताबिक, वन विभाग की प्रत्येक थार में लगभग 21 नए फीचर्स जोड़े गए थे। इन बदलावों के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे विभाग की पेट्रोलिंग और निगरानी क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, मुश्किल जंगली रास्तों पर रिस्पॉन्स टाइम कम होगा और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी। इन गाड़ियों को इस तरह तैयार किया गया था कि ये जंगल की आग बुझाने में भी मदद कर सकें।
आगे क्या होगा?
ओडिशा वन विभाग में ‘थार’ पर विवाद:वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गाड़ियों को दुर्गम इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए कस्टमाइज कराया गया था। हालांकि, अब सारा दारोमदार ऑडिट रिपोर्ट पर है। यदि जांच में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।



















