इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव

भड़काऊ बयान देने पर आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने की मांग
उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता से धारा 15(1) के तहत न्यायालय की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों पर आपराधिक अवमानना चलाने की अनुमति मांगी गई है। आरोप है कि कुछ मीडिया समूहों और अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट के फैसले को बिना पूरी तरह पढ़े भ्रामक और उत्तेजक बयान दिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव
पतियाली थाने के प्रकरण में दोनों पक्षों की शिकायतें लंबित
कासगंज जिले के पतियाली थाने में इस प्रकरण को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, जो जिला न्यायालय में विचाराधीन है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव
हाई कोर्ट ने केस को पोक्सो कोर्ट भेजा, सजा तय करने का अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास
17 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने बिना किसी पक्ष के हितों को प्रभावित किए, केस को पोक्सो न्यायालय वापस भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, विचारण न्यायालय को धारा 216 सीआरपीसी के तहत आरोपों को संशोधित करने और सजा तय करने का अधिकार है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव
पतियाली थाना प्रभारी और पीड़िता की मां को 6 माह की जेल संभव?
पीड़िता के जन्म प्रमाण पत्र से बड़ा खुलासा
हाई कोर्ट में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता का जन्म 12 फरवरी 2002 को हुआ था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि घटना की तिथि 10 नवंबर 2021 को वह बालिग थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव
पुलिस ने शिकायत के बावजूद नहीं की कार्रवाई
पीड़िता की मां ने अगले दिन कासगंज के पतियाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के ‘अटेंप्ट टू रेप’ विवाद पर आपराधिक अवमानना संभव
पोक्सो एक्ट के तहत पुलिस और शिकायतकर्ता पर कार्रवाई संभव
धारा 21 – पुलिस द्वारा बाल यौन हिंसा की रिपोर्ट दर्ज न करने पर कार्रवाई।
धारा 22 – झूठी शिकायत करने पर 6 माह की सजा का प्रावधान।



















