आयुष्मान योजना पर संकट: 600 करोड़ का भुगतान अटका, निजी अस्पतालों ने दी इलाज बंद करने की चेतावनी

आयुष्मान योजना पर संकट: 600 करोड़ का भुगतान अटका, निजी अस्पतालों ने दी इलाज बंद करने की चेतावनी, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) और शहीद वीरनारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों का सब्र अब जवाब दे रहा है। पिछले पांच महीनों से सरकार द्वारा लगभग 600 करोड़ रुपये का भुगतान न किए जाने के कारण अस्पतालों ने कड़ा रुख अपनाया है।
10 दिनों का अल्टीमेटम: स्वास्थ्य सेवाएं हो सकती हैं ठप
आयुष्मान योजना पर संकट:इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और एएचपीआई (AHPI) की हालिया बैठक में निजी अस्पतालों के संचालकों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर लंबित भुगतान जारी नहीं किया गया, तो वे आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद करने को मजबूर होंगे। यह फैसला छोटे और मध्यम दर्जे के अस्पतालों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के कारण लिया गया है।
2018 की दरों पर इलाज करना हुआ नामुमकिन
आयुष्मान योजना पर संकट:अस्पताल संचालकों की मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें आज भी वर्ष 2018 में निर्धारित दरों के आधार पर भुगतान किया जा रहा है। पिछले 6 वर्षों में चिकित्सा उपकरणों, दवाओं, नर्सिंग स्टाफ के वेतन और अन्य परिचालन लागतों में भारी वृद्धि हुई है। पुराने पैकेज रेट के कारण अस्पतालों के लिए गुणवत्तापूर्ण इलाज देना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। डॉक्टरों की मांग है कि महंगाई को देखते हुए आयुष्मान योजना के पैकेज रेट में तत्काल संशोधन किया जाए।
बायोमेडिकल वेस्ट और यूजर चार्ज का अतिरिक्त बोझ
आयुष्मान योजना पर संकट:बैठक में केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि ‘बायोमेडिकल वेस्ट’ के नाम पर वसूले जा रहे भारी-भरकम ‘यूजर चार्ज’ का मुद्दा भी गरमाया रहा। छोटे अस्पतालों का कहना है कि एक तरफ तो उन्हें समय पर पैसा नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर सरकार विभिन्न शुल्कों के माध्यम से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।
छोटे और मंझोले अस्पतालों पर तालाबंदी का खतरा
आयुष्मान योजना पर संकट:भुगतान की प्रक्रिया जटिल होने और राशि अटके होने के कारण कई छोटे अस्पताल अपने दैनिक खर्च और कर्मचारियों का वेतन देने में असमर्थ हो रहे हैं। यदि जल्द ही 600 करोड़ की इस लंबित राशि का निपटान नहीं हुआ, तो प्रदेश की एक बड़ी आबादी के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा बंद हो सकती है।



















