छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों पर गहराया संकट: बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए बीता सप्ताह बेहद निराशाजनक रहा है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तीन बड़े मांसाहारी वन्यजीवों (Big Cats) की मौत की खबरें सामने आई हैं। जहाँ सूरजपुर और खैरागढ़ में बाघ और तेंदुए के शिकार की आशंका ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, वहीं बिलासपुर के जू में एक उम्रदराज बाघिन की प्राकृतिक मौत हुई है।
यहाँ विस्तार से पढ़ें इन तीनों घटनाओं के बारे में:
1. सूरजपुर: बाघ का शव मिलने से हड़कंप, शिकार के पुख्ता सबूत
सूरजपुर वनमंडल के अंतर्गत आने वाले घुई वन परिक्षेत्र के रेवटी जंगल में एक बाघ का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। यह घटना तब सामने आई जब भैसामुण्डा सर्किल के ग्रामीण जंगल की ओर गए थे और उन्होंने वहां बाघ का शव देखा।
घटनास्थल पर मिले संदिग्ध निशान
सूचना मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी, रेंजर से लेकर मुख्य वन संरक्षक (CCF) तक, पशु चिकित्सकों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव की स्थिति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ की मौत करीब 3 से 4 दिन पहले हुई है, क्योंकि शव फूल चुका है और उसमें सड़न पैदा हो गई है।बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम
शिकार की गहरी साजिश
प्रथम दृष्टया यह मामला अवैध शिकार (Poaching) का प्रतीत हो रहा है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
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बाघ के शरीर पर चोट के गहरे निशान पाए गए हैं।
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शव से कीमती अंग जैसे दांत और नाखून गायब हैं।
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मौके से एक धारदार हथियार बरामद हुआ है, जिसका इस्तेमाल संभवतः अंगों को निकालने के लिए किया गया होगा।
अधिकारियों ने साक्ष्य जुटाने के लिए गुरु घासीदास अभयारण्य और कानन पेंडारी से स्नीफर डॉग्स (खोजी कुत्तों) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया है, ताकि शिकारियों तक पहुंचा जा सके।
2. खैरागढ़: तेंदुए की निर्मम हत्या, पंजे और जबड़ा काटकर ले गए तस्कर
दूसरी दिल दहला देने वाली घटना खैरागढ़-डोंगरगढ़ सीमा पर स्थित वन ग्राम बनबोड़ से सामने आई है। यहाँ शिकारियों ने एक वयस्क तेंदुए को अपना निशाना बनाया। यह मामला संगठित वन्यजीव अपराध की ओर इशारा करता है क्योंकि शिकारियों ने तेंदुए के शरीर को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था।
अवैध शिकार का भयावह रूप
खैरागढ़ वनमंडल के कोपेनवागांव-मुढ़ीपार क्षेत्र में मिले इस शव के निरीक्षण में पाया गया कि शिकारियों ने तेंदुए के चारों पंजे, नाखून और यहां तक कि जबड़े के दांत भी काट लिए थे। शव जंगल के पास राजस्व भूमि पर पड़ा मिला, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है।बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम
जांच और कार्रवाई
रेंजर आर.के. टंडन के अनुसार, विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है जिनसे पूछताछ जारी है। डॉग स्क्वायड की मदद से आसपास के गांवों में तलाशी ली जा रही है। तेंदुए का पोस्टमार्टम वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने पर मौत के सही कारणों का खुलासा होगा। वन विभाग ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम
3. बिलासपुर: कानन पेंडारी जू की शान ‘रागिनी’ की विदाई
इन दो शिकार की घटनाओं के बीच एक दुखद खबर बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन से भी आई है। यहाँ पिछले कई वर्षों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही बाघिन ‘रागिनी’ की मृत्यु हो गई है।
उम्रदराज होने के कारण हुई मौत
डॉक्टरों के मुताबिक, रागिनी की मौत का कारण उसकी अधिक उम्र और बीमारी थी। सामान्यतः बाघों की उम्र 16 से 17 वर्ष होती है, लेकिन रागिनी 18 वर्ष की आयु पार कर चुकी थी। वह 11 अगस्त 2018 को रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी से यहाँ लाई गई थी और लाने के समय से ही बीमार चल रही थी।बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम
जू के डॉ. पी.के. चंदन की निगरानी में उसका निरंतर उपचार चल रहा था। बीमारी के बावजूद वह काफी फुर्तीली थी, लेकिन आखिर में उम्र के तकाजे के आगे उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत से जू प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है।बाघ और तेंदुए का क्रूर शिकार, नाखून-दांत गायब; जू में बाघिन ने तोड़ा दम









