बेटियों ने फिर फहराया परचम: DU की छात्रा श्रेजल बनीं एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर, पिता जमीन पर तो बेटी आसमान में करेगी देश की रक्षा

दिल्ली: बेटियों ने फिर फहराया परचम: DU की छात्रा श्रेजल बनीं एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर, पिता जमीन पर तो बेटी आसमान में करेगी देश की रक्षा, हिमाचल प्रदेश की एक और जांबाज बेटी ने आसमान की ऊंचाइयों को छूकर इतिहास रच दिया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की छात्रा श्रेजल गुलेरिया ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। श्रेजल की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलने का जज्बा रखते हैं।
पारिवारिक विरासत: दादा और पिता के नक्शेकदम पर श्रेजल
बेटियों ने फिर फहराया परचम: श्रेजल का जन्म हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक ऐसे परिवार में हुआ, जहाँ देशभक्ति रग-रग में बसी है। श्रेजल के दादाजी फौज से रिटायर हो चुके हैं और उनके पिता वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर तैनात होकर सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं।
बेटियों ने फिर फहराया परचम: जहाँ परिवार की पिछली पीढ़ियों ने ‘जमीन’ पर रहकर भारत माता की सेवा की, वहीं श्रेजल ने अब ‘आसमान’ से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने का फैसला किया है। अपनी इस पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने CDS (Combined Defence Services) परीक्षा में पूरे देश में 12वीं रैंक हासिल कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है।
नवोदय से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का शानदार सफर
बेटियों ने फिर फहराया परचम: श्रेजल की सफलता का रास्ता उनकी शुरुआती पढ़ाई से ही तैयार होने लगा था।
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प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने कक्षा 6 से 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) से की, जहाँ उन्होंने नेतृत्व और अनुशासन के गुण सीखे।
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हायर एजुकेशन: स्कूल के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित कॉलेज से मैथमेटिक्स (BSc Hons) में स्नातक किया।
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लक्ष्य पर फोकस: पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान ही श्रेजल ने CDS की तैयारी शुरू कर दी थी। गणित की छात्रा होने के कारण उनकी तार्किक क्षमता पहले से ही मजबूत थी, जिसका लाभ उन्हें परीक्षा में मिला।
वायुसेना अकादमी में शुरू होगा कड़ा प्रशिक्षण
बेटियों ने फिर फहराया परचम: श्रेजल अपनी सफलता के बाद अब देश सेवा के अगले पड़ाव की ओर बढ़ चुकी हैं। वह 27 दिसंबर को वायुसेना अकादमी (Air Force Academy) के लिए रवाना हो गई हैं। यहाँ उन्हें एक साल के कठिन सैन्य प्रशिक्षण (Training) से गुजरना होगा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वह आधिकारिक रूप से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े या तकनीकी शाखा का हिस्सा बनकर उड़ान भरेंगी।
युवाओं और लड़कियों के लिए बनीं ‘रोल मॉडल’
बेटियों ने फिर फहराया परचम: श्रेजल की इस उपलब्धि से न केवल उनके गांव बल्कि पूरे इलाके में जश्न का माहौल है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि आपके पास स्पष्ट लक्ष्य और उसे पाने के लिए अटूट मेहनत है, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। खासकर ग्रामीण परिवेश की लड़कियों के लिए श्रेजल एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।









