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पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला: दिल्ली में प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में?

नई दिल्ली: पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला: दिल्ली में प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में? राजधानी में अपराध और अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला हुआ है। यह घटना शनिवार रात पहाड़गंज स्थित उनके आवास के बाहर हुई, जहाँ दो अज्ञात हमलावरों ने उन पर ईंट से हमला करने का प्रयास किया और जान से मारने की धमकियाँ दीं। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमले का खौफनाक मंजर

शनिवार रात करीब 10:07 बजे, जब मणि आर्य अपने घर के अंदर थे, तभी दो युवक उनके दरवाजे पर पहुँचे। उन्होंने जालीदार दरवाजे से अंदर खड़े पत्रकार को देखकर उन पर एक ईंट फेंकी। सौभाग्य से दरवाजा बंद होने के कारण ईंट दरवाजे पर लगी और मणि आर्य बाल-बाल बच गए। हमलावर इस दौरान उन्हें गालियाँ देते रहे और जान से मारने की धमकियाँ देते हुए मौके से फरार हो गए।पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

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पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

मणि आर्य ने तुरंत रात 10:12 बजे पीसीआर को कॉल कर हमले की सूचना दी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें कोई तत्काल पुलिस सहायता नहीं मिली। उन्होंने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि राजधानी के दिल में एक पत्रकार पर हमला होता है और पुलिस त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहती है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

सीसीटीवी में कैद हुए हमलावर

अगले दिन, थाना नबी करीम से एसआई हर्ष और हेड कांस्टेबल विकास ने मौके का मुआयना किया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में दोनों हमलावर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मणि आर्य ने यह भी बताया कि चश्मदीद गवाहों के अनुसार, हमलावरों में से एक की पैंट में रिवॉल्वर भी देखी गई थी।पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

सुनियोजित हमले का आरोप, पहले भी मिली थी धमकियाँ

पत्रकार मणि आर्य ने अपनी शिकायत में इस हमले को एक सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसके पीछे मनीष चड्ढा और बलविंदर कपूर का हाथ हो सकता है। मणि आर्य ने दावा किया कि उन्होंने 15 और 18 सितंबर को भी इन्हीं व्यक्तियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीसीपी सेंट्रल और एसएचओ नबी करीम को लिखित शिकायतें दी थीं, जिसमें उन्हें मिली धमकियों का जिक्र था।पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

पत्रकार जगत में आक्रोश

इस घटना से पूरे पत्रकार समुदाय में गहरा आक्रोश है। पत्रकार संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे लोकतंत्र तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर दिल्ली जैसे महानगर में पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो जनता की आवाज़ कौन उठाएगा और सच्चाई को सामने लाने का काम कौन करेगा?पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

न्याय की मांग और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील

मणि आर्य ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Delhi), दिल्ली पुलिस कमिश्नर, डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, पीएमओ और गृह मंत्रालय से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि भविष्य में उन्हें या उनके परिवार को किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि होती है, तो उसके लिए वे ही लोग जिम्मेदार होंगे जिनके नाम उन्होंने पुलिस को दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पत्रकार बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।पत्रकार मणि आर्य पर जानलेवा हमला

Dr. Tarachand Chandrakar

Editor-in-Chief

डॉ. ताराचंद चंद्राकर एक प्रखर विचारक और अनुभवी पत्रकार हैं, जो 'निडर छत्तीसगढ़' के माध्यम से निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। तथ्यों की शुद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में एक विश्वसनीय नाम बनाया है।

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