
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शारीरिक संबंध के बाद ‘कुंडली’ का बहाना बनाकर शादी से मुकर जाना अब पड़ेगा भारी, देश की राजधानी की उच्च न्यायालय ने महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पुरुष किसी महिला के साथ शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में ‘कुंडली न मिलने’ (Horoscope Mismatch) का बहाना बनाकर विवाह से पीछे हट जाता है, तो इसे ‘धोखा’ माना जाएगा।
शादी का झूठा वादा और कानून: दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की एकल पीठ ने एक बलात्कार मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और आईपीसी की धारा 376 के तहत, झूठे वादे पर आधारित शारीरिक संबंध बनाना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘कुंडली मिलान’ जैसे कारणों का उपयोग शादी के वादे से मुकरने के लिए एक हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता।
‘कुंडली नहीं मिली’ – क्या यह सिर्फ एक बहाना है?
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अगर किसी पुरुष ने महिला को विवाह का पूर्ण आश्वासन दिया था और उसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए थे, तो बाद में कुंडली का मुद्दा उठाना यह दर्शाता है कि उसका वादा शुरू से ही संदिग्ध था। जस्टिस शर्मा के अनुसार, यदि कुंडली मिलान वास्तव में इतना महत्वपूर्ण था, तो इसे शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही स्पष्ट कर लिया जाना चाहिए था।
WhatsApp चैट ने खोली पोल: ‘कल ही कर रहे हैं शादी’
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने लंबे समय तक शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। पुलिस जांच और कोर्ट की सुनवाई के दौरान व्हाट्सएप (WhatsApp) चैट एक बड़ा सबूत बनकर सामने आई। चैट में आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया था कि उनकी कुंडली मिल चुकी है और कोई समस्या नहीं है। आरोपी ने एक मैसेज में यहाँ तक लिखा था, ‘कल ही शादी कर रहे हैं हम।’
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:कोर्ट ने इस साक्ष्य को आधार मानते हुए कहा कि जब आरोपी खुद पहले कुंडली मिलने की बात स्वीकार कर चुका था, तो बाद में उसी का बहाना बनाकर मुकर जाना उसकी खराब नियत को दर्शाता है।
पीड़िता के साथ बार-बार हुआ विश्वासघात
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:शिकायतकर्ता महिला ने अदालत को बताया कि आरोपी और उसके परिवार ने कई बार शादी का भरोसा देकर उसे गुमराह किया। यहाँ तक कि एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद जब आरोपी के परिवार ने फिर से विवाह का वादा किया, तो महिला ने शिकायत वापस ले ली थी। लेकिन इसके बावजूद आरोपी अपने वादे से फिर मुकर गया। इसी व्यवहार को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
क्या कहती है कानून की नई धारा?
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 विशेष रूप से उन मामलों पर केंद्रित है जहाँ शादी का झूठा वादा करके या पहचान छिपाकर किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाए जाते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला इस धारा की व्याख्या को और मजबूत करता है, जिससे भविष्य में ‘शादी के झूठे वादे’ वाले मामलों में महिलाओं को न्याय मिलना आसान होगा।



















