CGMSC घोटाले में ED का डबल एक्शन: बिलासपुर में GM के घर 10 घंटे चली रेड, दुर्ग में मोक्षित कॉर्पोरेशन पर फिर दबिश
मुख्य बातें:
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छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई।
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बिलासपुर में CGMSC के उपकरण महाप्रबंधक के.के. पाटनवार के घर 10 घंटे से ज्यादा चली पूछताछ।
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दुर्ग में घोटाले की मुख्य आरोपी कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन के ठिकानों पर भी ED का छापा।
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EOW की कार्रवाई के बाद अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच में जुटी ED।
बिलासपुर/दुर्ग। CGMSC घोटाले में ED का डबल एक्शन: बिलासपुर में GM के घर 10 घंटे चली रेड, छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाले (CGMSC Scam) में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के बाद अब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच तेज कर दी है। बुधवार को ED की टीमों ने एक साथ बिलासपुर और दुर्ग में बड़ी कार्रवाई करते हुए घोटाले के मुख्य किरदारों के ठिकानों पर दबिश दी।
बिलासपुर: GM के घर 10 घंटे तक खंगाले दस्तावेज
बिलासपुर के सरकंडा स्थित अशोक नगर में CGMSC के उपकरण महाप्रबंधक (GM-Equipment) कमल कांत पाटनवार के घर सुबह-सुबह ED की 12 सदस्यीय टीम ने छापा मारा। रायपुर से पहुंची टीम ने के.के. पाटनवार से 10 घंटे से भी अधिक समय तक लंबी पूछताछ की। इस दौरान टीम ने उनका मोबाइल फोन और घर से मिले कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों से घोटाले की कई परतें खुल सकती हैं। पाटनवार पर आरोप है कि उन्होंने उपकरण खरीदी में नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया।CGMSC घोटाले में ED का डबल एक्शन: बिलासपुर में GM के घर 10 घंटे चली रेड
दुर्ग: फिर ED की रडार पर मोक्षित कॉर्पोरेशन
एक ओर जहां बिलासपुर में पाटनवार से पूछताछ चल रही थी, वहीं दूसरी ओर दुर्ग में ED की एक अन्य टीम ने घोटाले की मुख्य आरोपी फर्म, मोक्षित कॉर्पोरेशन के तीन ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। दो दर्जन से अधिक अधिकारियों की टीम ने सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा में इस कार्रवाई को अंजाम दिया। यह कार्रवाई 650 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले की जांच का हिस्सा है।CGMSC घोटाले में ED का डबल एक्शन: बिलासपुर में GM के घर 10 घंटे चली रेड
क्या है CGMSC घोटाला?
यह मामला सरकारी अस्पतालों में मेडिकल उपकरण और रीएजेंट सप्लाई में हुई भारी गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि CGMSC के अधिकारियों ने दुर्ग की मोक्षित कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया और गुणवत्ताहीन सामग्री को ऊंची कीमतों पर खरीदकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है, जिसके बाद EOW और ACB ने इसी साल जनवरी में मोक्षित कॉर्पोरेशन के खिलाफ FIR दर्ज कर कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान भी जांच एजेंसियों ने लेन-देन और टेंडर से जुड़े कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए थे। अब ED की एंट्री से इस घोटाले में शामिल बड़े चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद बढ़ गई है।CGMSC घोटाले में ED का डबल एक्शन: बिलासपुर में GM के घर 10 घंटे चली रेड