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Forest  Department Durg : सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

सुचना का अधिकार अधिनियम जो कि संसद द्वारा लोकसेवको के कार्य की निगरानी एवं उनके द्वारा किये गए कृत्यों को जनता तक आसानी से पहुच के लिए बनाया गया कानून है जिसके तहत आवेदक को जानकारी न देकर खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग दुर्ग  के जनसूचना अधिकारी

बात दरअसल ये है कि आवेदक डॉ ताराचंद चंद्राकर (सामाजिक कार्यकर्ता एवम पत्रकार) द्वारा दुर्ग वन वृत्त के वनमंडलाधिकारी कार्यालय दुर्ग में दिनांक 29/09/2022 को  सूचना का अधिकार के अंतर्गत आवेदन किया था जिसकी  नियमानुसार 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद भी वन विभाग दुर्ग के जन सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझकर अपूर्ण जानकारी नहीं दी गई ।सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

इससे तो साफ स्पष्ट हो रहा है की इस विभाग में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। अब यह समझ से परे है कि यहाँ इतने बड़े ओहदे पर बैठे विद्वान् IFS अधिकारी श्रीमान शशि कुमार से सूचना देने में चुक कैसे हो गयी l क्या उनको आवेदक द्वारा मांगी गयी सूचना की विषयवस्तु पता नहीं थी या उनके कार्यालय में पदस्थ सहायक अधिकारी उनको जानबूझकर बताये नहीं l इस तरह पहले तो आवेदन के विषयवस्तु को कार्यालयीन कार्यरत कर्मचारी/अधिकारी खुद ही समझ नहीं पाए जिसके चलते उनके द्वारा जवाब आया कि केवल एक विषयवस्तु में एक बिंदु (जबकि आवेदन कंडिकावारथी) की सूचना दी जाएगीlसुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

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दुसरे कंडिका की जानकारी के लिए अलग से आवेदन लगाये l जबकि आवेदक द्वारा मांगी गयी जानकारी एक विषयवस्तु में एवं 150 शब्दों से अधिक नहीं थी l इतना ही नहीं कार्यालय वनमंडलाधिकारी द्वारा आवेदक को लगातार गुमराह किया गया पहले तो जानकारी लेने के लिए आवेदक को कार्यालय बुलाया गया जहा पर सिर्फ साधारण जानकारी दी गयी, जबकि आवेदक गवारा प्रमाणित जानकारी मांगी गयी थी एवं बकायदा जानकारी के लिए शुल्क भी जमा किया गया था l आवेदक द्वारा अनुरोध करने पर फिर से कार्यालय बुलाया गया जहा पर उन्हें प्रमाणित जानकारी जानकारी दी गयी वो अपूर्ण lllसुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

चलो एक पल के लिए उनकी बात को सही मान ही ले पर दुसरे आवेदन का क्या …..

द्वितीय कंडिका के लिए आवेदक ने फिर से  दिनांक 05/12/20’22 को सुचना का आवेदन लगाया इस बार फिर से नया बहाना…..पहले तो आवेदक का पोस्टल ऑर्डर ही आवेदन से गायब कर दिया फिर कहा आवेदन फीस जमा करो परेशां हताश आवेदक करे तो करे ही क्या ?  आवेदक ने फिर वनमंडलाधिकारी के कार्यालय जाकर इस बार 10/- रूपये की नगद जमा की lसुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

इस बार भी आवेदक को मांगी गयी सुचना नहीं दी गयी….

क्योकि जब अधिकारी आवेदक को जानकारी नहीं देने का एक बार मन बना ले तब उनके लिए कोई नियम कानून मायने नहीं रखता है l क्योकि जनसूचना अधिकारी को संसद द्वारा बनाये गए कानून एवं भारत के संविधान से कोई सरोकार नहीं है, कार्यालय में तो अधिकारी, कर्मचारी अपना राज चलते हैजैसे वे लोकसेवक नहीं जनता के मालिक हो l क्या अधिकारी भूल गए है की वे लोकसेवक है या वे लोकसेवक की परिभाषा नहीं जानते है l सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

उसका कौन क्या बिगड़ सकता है क्योकि अपील में जनसूचना अधिकारी को कुछ फर्क नहीं पड़ना है आयोग का फैसला आते आते तो वर्षो लग जाते है ऐसे में आवेदक करे तो क्या करे !!! और जब तक आयोग की सुनवाई होगी तब तक जनसूचना अधिकारी ही कहा पदस्थ रहेंगे इसका भी कोई अता पता नहीं रहता है इतने दिनों में तो कई आवेदक का मनोबल ही टूट  जाया रहता है और आयोग की पेशी तो पूछो ही मत तारीख पे तारीख…?? आखिर कब जनता को उनके नैसर्गिक न्याय का अधिकार मिलेगा? कब तक राज्य सुचना आयोग जनसूचना अधिकारियो को बचाते रहेंगे , क्या सुचना आयोग की सुनवाई खेल का मैदान है जहा पर जनसूचना अधिकारी एवं अपीलीय अधिकारी जैसे चाहे वैसे खेलते रहते है  जिससे आवेदक गणों को हमेशा निराश हताश होना पढता है l  आखिर सुचना का अधिकार कानून बनाने के पीछे का क्या उद्देश्य है क्या जनता को इन्हें समझाना पड़ेगा lसुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

क्या कहता है सूचना का अधिकार अधिनियम

यह अधिनियम 12 अक्टूबर सन 2005 से पूर्णतः लागू हुआ था । जिसका उद्देश्य नागरिक द्वारा सूचना का अधिकार के माध्यम से लोक प्राधिकारीयो के नियंत्रण में रखी सूचना पाना सुनिश्चित किया जा सके जिससे कि प्रत्येक लोक प्राधिकारी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया जा सके।सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

भारत के संविधान ने लोकतंत्र की स्थापना की है और लोकतंत्र सूचना प्राप्त नागरिक वर्ग तथा सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है। नागरिक और सूचना सरकारों की उचित कार्य पद्धति कार्यक्रम तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अनिवार्य है शिक्षित नागरिक और सूचना यह दोनों सरकारों और उसके परिकरणो को हुकूमत अर्थात जनता के शासन के प्रति उत्तरदाई बनाने के लिए भी अनिवार्य है।सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

अधिनियम के अनुसार प्रत्येक शासकीय अर्धशासकीय एवं शासन द्वारा वित्त पोषित संस्थान इत्यादि कार्यालय में जन सूचना अधिकारी रहेंगे। प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को सूचना का आवेदन का जवाब देने के लिए विधि द्वारा 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। एवम दिए गए जवाब में अपना नाम पदनाम एवं अपीलीय अधिकारी का नाम पदनाम एवं पूर्ण पता लिखना है।सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

इसके लिए भी छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि, प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को सूचना का अधिकार आवेदन के निराकरण में अपना नाम पदनाम कार्यालय का पूर्ण पता एवं अपीलीय अधिकारी का नाम पदनाम एवं उनके कार्यालय का पूर्ण पता देना है। लेकिन इसके बावजूद जन सूचना अधिकारी नियमों को ताक में रखकर खुलेआम सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की अवमानना कर रहे हैं । जिसके लिए सामान्य प्रशासन को उनके ऊपर सख्त कदम उठाना चाहिए, अन्यथा नागरिकों का सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति विश्वास खत्म हो जाएगा।सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है वन विभाग  दुर्ग

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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