LIVE UPDATE
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: क्या फाइलों में दफन हो गया न्याय? डीएफओ की चुप्पी पर उठे सवाल!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ के जंगलों की रक्षा करने वाला विभाग खुद भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के घेरे में है। मरवाही वनमंडल में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि यहाँ कानून का पालन करने वाले ही अब उसकी ‘हत्या’ पर उतारू हैं।

प्रशासन के आदेश की अनदेखी: आखिर किसकी शह पर?

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: यह पूरा मामला तब गरमाया जब लिखित शिकायत के बाद जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझा और जांच की अनुमति दी। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर की ओर से स्पष्ट जांच आदेश भी जारी किए गए। लेकिन, सवाल यह उठता है कि आखिर मरवाही वनमंडल अधिकारी (DFO) ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया?

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: आरोप लग रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया गया है। दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने के बजाय, पूरे मामले को कागजी लीपापोती तक सीमित कर दिया गया। क्या यह सिस्टम की विफलता है या भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें?

कुर्सी पर जमे ‘फर्जी’ कर्मचारी, सिस्टम पर भारी भ्रष्टाचार

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप है, वे न केवल अपनी कुर्सी पर सुरक्षित बैठे हैं, बल्कि सरकारी खजाने से वेतन भी उठा रहे हैं। यह स्थिति उन ईमानदार युवाओं के साथ क्रूर मजाक है जो दिन-रात मेहनत कर नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।

जांच में हुई लापरवाही के तीन बड़े संकेत:

  1. आदेश के बावजूद जांच प्रक्रिया शुरू न होना।

  2. आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न होना।

  3. उच्चाधिकारियों के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना।

अब जनता की मांग: कब होगी कड़ी कार्रवाई?

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब पूरे जिले में विरोध के सुर तेज हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निम्नलिखित सख्त कदम उठाने की मांग की है:

  • तत्काल FIR: फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले कर्मचारियों पर तुरंत मुकदमा दर्ज हो।

  • DFO का निलंबन: जांच आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने के आरोप में मरवाही वनमंडल अधिकारी को पद से हटाया जाए।

  • स्वतंत्र जांच: पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

साख की परीक्षा में प्रशासन

मरवाही वन विभाग में ‘फर्जीवाड़ा’ का बोलबाला: यदि जिला प्रशासन अब भी मौन रहता है, तो यह संदेश जाएगा कि प्रशासनिक आदेशों की कोई कीमत नहीं है और फर्जीवाड़ा करने वाले लोग व्यवस्था से अधिक शक्तिशाली हैं। यह केवल एक विभागीय जांच नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ प्रशासन की साख और ‘कानून के राज’ की कड़ी परीक्षा है। अब देखना यह है कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाता है या यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

Dr. Tarachand Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE