
Gorakhpur District Jail News: Gorakhpur Jail Attack: जेल में ‘खूनी खेल’! बंदी पर नुकीले हथियार से हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला कारागार (District Jail) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जेल की हाई-सिक्योरिटी और बैरकों की निगरानी को धता बताते हुए एक बंदी ने दूसरे बंदी पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था (Security Arrangements) की पोल खोलकर रख दी है।
क्या है पूरी घटना? (The Incident Details)
Gorakhpur Jail Attack: जानकारी के मुताबिक, संतकबीरनगर के खलीलाबाद निवासी सुशील कुमार चौधरी धोखाधड़ी के एक मामले में गोरखपुर जिला कारागार की बैरक नंबर 26 में बंद हैं। आरोप है कि 10 फरवरी की रात करीब 3:30 बजे, उनके साथ रहने वाले सह-बंदी (Co-inmate) खरभान यादव उर्फ राहुल यादव ने पहले उनके साथ गाली-गलौज की और फिर अचानक किसी नुकीली वस्तु (Sharp Object) से उन पर हमला कर दिया।
जेल के अंदर हथियार कैसे पहुंचा? (Security Breach Questions)
Gorakhpur Jail Attack: इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल के भीतर कोई नुकीली चीज कैसे पहुंची?
क्या जेल की चेकिंग में लापरवाही बरती गई?
बैरक के अंदर बंदियों के पास ऐसी वस्तुएं कहां से आ रही हैं?
क्या रात के समय बैरकों की पेट्रोलिंग में कमी थी?
घायल बंदी ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
Gorakhpur Jail Attack: हमले में घायल सुशील कुमार ने 11 फरवरी को Jail Superintendent (जेल अधीक्षक) को प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि जेल के अंदर उनकी जान को खतरा है। जेल प्रशासन की तहरीर मिलने के बाद Shahpur Police Station में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस और प्रशासन का पक्ष (Official Statement)
Gorakhpur Jail Attack: मामले की गंभीरता को देखते हुए SP City Abhinav Tyagi ने बताया कि घायल बंदी की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
जेल के अंदर नुकीली वस्तु कैसे पहुंची, इसकी गहन जांच की जाएगी।
ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की भूमिका की भी जांच होगी।
दोषी पाए जाने वाले शख्स या अधिकारी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
Gorakhpur Jail Attack: गोरखपुर जेल की यह घटना जेल मैन्युअल और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है। अब देखना यह है कि पुलिस जांच में क्या बड़े खुलासे होते हैं और जेल के भीतर ‘हथियारों’ की एंट्री पर कैसे लगाम लगती है।



















