जगदलपुर। सरकारी पैसे की बर्बादी और प्रशासनिक उदासीनता का एक जीता-जागता सबूत जगदलपुर के जवाहर वार्ड में देखने को मिल रहा है। नगर निगम द्वारा मध्यम वर्गीय परिवारों की सुविधा के लिए बनाया गया ‘सर्व-मांगलिक भवन’ आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। हैरानी की बात यह है कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बना यह भवन अपने उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो चुका है।
उद्घाटन की बाट जोहता रह गया ‘सर्व-मांगलिक भवन’
पिछले पांच वर्षों से यह आलीशान इमारत अपने उद्घाटन का इंतजार कर रही है। शहर के मध्यम वर्गीय परिवारों को शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों के लिए सस्ती जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसका निर्माण कराया गया था। लेकिन निगम की अनदेखी के चलते, जनता को सुविधा मिलने से पहले ही यह भवन कबाड़ में तब्दील होने लगा है। बिना उपयोग के पड़ी यह इमारत अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।3 करोड़ का भवन उद्घाटन से पहले बना खंडहर, चोरी हुए दरवाजे और खिड़कियां
असामाजिक तत्वों का अड्डा: दरवाजे गायब, सीलिंग धंसी
देखरेख और सुरक्षा के अभाव में यह भवन अब असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि:
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भवन में लगे महंगे दरवाजे और खिड़कियां चोरी हो चुके हैं।
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मुख्य गेट के कांच टूट चुके हैं।
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छत की सीलिंग जगह-जगह से धंसने लगी है।
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परिसर की खाली पड़ी जमीन पर भू-माफिया अतिक्रमण की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनता की गाढ़ी कमाई से बना यह भवन अब सुरक्षित नहीं रह गया है और प्रशासन मौन है।
गुणवत्ता की अनदेखी और भ्रष्टाचार की बू
वार्डवासियों के अनुसार, निर्माण के दौरान ही भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे। घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग साफ दिखाई दे रहा था, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने न तो क्वालिटी चेक (Quality Check) की जहमत उठाई और न ही इसके रखरखाव की कोई योजना बनाई। अब आलम यह है कि लोग संदेह जता रहे हैं कि क्या यह भवन कभी सुरक्षित रूप से उपयोग के लायक हो पाएगा?3 करोड़ का भवन उद्घाटन से पहले बना खंडहर, चोरी हुए दरवाजे और खिड़कियां
लापरवाही पर लीपापोती: अब मरम्मत के नाम पर 30 लाख का नया खेल
हैरत की बात यह है कि जिस ठेकेदार ने घटिया निर्माण किया, उस पर कोई कार्रवाई या जवाबदेही तय करने के बजाय, नगर निगम अब मरम्मत के नाम पर 30 लाख रुपये और खर्च करने का प्रस्ताव बना रहा है। एक तरफ नया भवन खंडहर बन गया और दूसरी तरफ उसे सुधारने के नाम पर फिर से लाखों का बजट बनाना, सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।3 करोड़ का भवन उद्घाटन से पहले बना खंडहर, चोरी हुए दरवाजे और खिड़कियां
2021 से उठ रही थी आवाज, अधिकारियों ने मूंदी आंखें
इस मामले में पूर्व पार्षद धनसिंह ने साल 2021 में ही प्रशासन को चेताया था। उन्होंने भवन में दरारें आने और घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर कलेक्टर और निगम आयुक्त से शिकायत की थी और जांच की मांग उठाई थी। उनका कहना है कि निर्माण की निगरानी का जिम्मा सब-इंजीनियरों पर था, लेकिन सबने इसे नजरअंदाज किया। आज तक न तो कोई जांच हुई और न ही किसी दोषी पर कार्रवाई, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।3 करोड़ का भवन उद्घाटन से पहले बना खंडहर, चोरी हुए दरवाजे और खिड़कियां