रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी! GST रजिस्ट्रेशन की लिमिट 1 करोड़ हो सकती है

नई दिल्ली: रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!, देश के लाखों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आ सकती है। सरकार जल्द ही जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा को 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर सकती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल पेमेंट, खासकर यूपीआई (UPI) को बढ़ावा देना और छोटे कारोबारियों को जीएसटी नोटिस के डर से मुक्त करना है।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
दरअसल, बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने वित्त मंत्रालय से यह सिफारिश की है। उनका मानना है कि जीएसटी नोटिस के डर के कारण बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले डिजिटल पेमेंट लेने से कतरा रहे हैं। रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!
हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां गोलगप्पे वाले या सब्जी वाले जैसे छोटे व्यापारियों के खाते में सालभर में 40 लाख से ज्यादा का टर्नओवर दिखने पर उन्हें जीएसटी नोटिस भेज दिए गए। इस डर के कारण कई छोटे व्यापारी अब UPI से पेमेंट लेने में हिचक रहे हैं, जिससे डिजिटल लेन-देन की रफ्तार पर असर पड़ रहा है। रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!
छोटे कारोबारियों को कैसे मिलेगी राहत?
अगर सरकार इस सुझाव को मान लेती है और नया नियम लागू होता है, तो 1 करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!
इससे वे बिना किसी डर के ग्राहकों से UPI या अन्य डिजिटल तरीकों से पेमेंट ले सकेंगे।
यह कदम न केवल उनके व्यापार को सुगम बनाएगा, बल्कि देश में डिजिटल इकोनॉमी को भी मजबूती देगा।
पिछले कुछ महीनों से कई हितधारकों के बीच इस विषय पर चर्चा चल रही है और जल्द ही इस पर कोई सकारात्मक फैसला आने की उम्मीद है।
अभी क्या हैं GST रजिस्ट्रेशन के नियम?
मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी कारोबारी का सालाना टर्नओवर अगर 40 लाख रुपये से अधिक होता है, तो उसके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसी नियम के कारण कई छोटे व्यापारी, जिनका टर्नओवर डिजिटल पेमेंट के कारण इस सीमा को पार कर जाता है, वे टैक्स विभाग के रडार पर आ जाते हैं। रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!
बैंकों ने MDR चार्ज का भी दिया सुझाव
छोटे व्यापारियों को राहत देने के साथ ही, बैंकों ने सरकार से बड़े यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर (MDR – Merchant Discount Rate) चार्ज लगाने पर भी विचार करने को कहा है। एमडीआर वह फीस है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट सर्विस के बदले बैंकों को चुकाते हैं। फिलहाल, यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड पर कोई एमडीआर नहीं लगता है। बैंकों का तर्क है कि बड़े ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में मदद मिलेगी। रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी खुशखबरी!



















