
Bilaspur-GPM News: Chhattisgarh Cow Dung Scam: फर्जी साइन और फर्जी बिल! गोबर खरीदी के नाम पर ₹14.77 लाख का गबन, जांच के घेरे में बड़े अधिकारी!, छत्तीसगढ़ के वन विभाग (Forest Department) में भ्रष्टाचार का एक नया और अनोखा मामला सामने आया है। इसे आप ‘Gober Scam’ (गोबर घोटाला) कह सकते हैं। बिलासपुर से लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) तक के वन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी प्रमाणक (Vouchers) तैयार कर सरकारी खजाने से ₹14.77 लाख से अधिक की राशि पार कर दी है।
क्या है पूरा मामला? (The Modus Operandi)
Chhattisgarh Cow Dung Scam:शिकायत के अनुसार, तत्कालीन वनमंडल अधिकारी (DFO) रौनक गोयल इस पूरे घोटाले के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने गोबर खाद खरीदी के नाम पर ₹14.77 लाख डकारने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए।
घोटाले की बड़ी बातें:
फर्जी हस्ताक्षर (Forgery): मरवाही के परिक्षेत्र अधिकारी और पेंड्रा के उपवनमंडल अधिकारी के कूटरचित (Fake) साइन करवाकर सरकारी खाते से पैसे निकाले गए।
असंभव टारगेट (Practically Impossible): कागजों में दिखाया गया कि मात्र 10 दिनों (2 मई से 11 मई 2022) के भीतर 1847 घन मीटर गोबर खाद खरीदी गई और उसे गड्ढों में डाल भी दिया गया। जानकारों का कहना है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में खाद जुटाना नामुमकिन है।
Missing Details: वाउचर में न तो गाड़ी का नंबर है, न चालान और न ही सामग्री वितरण की कोई जानकारी।
29 महीने बाद ‘मैनेज’ किया गया पैसा
Chhattisgarh Cow Dung Scam:हैरानी की बात यह है कि गोबर खरीदी 2022 में दिखाई गई, लेकिन उसका पैसा 29 महीने बाद अक्टूबर 2024 में CAMPA मद से एडजस्ट किया गया। इसके लिए पिपरिया और खुरपा वन प्रबंधन समितियों के सचिवों पर दबाव बनाकर बैंक खातों से पैसे निकलवाए गए।
गवाहों ने खोले राज (Witness Statements)
जांच समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
सुरेश कुमार राठौर (वन चौकीदार): इन्होंने बताया कि ₹5,50,000 की रकम DFO रौनक गोयल तक पहुंचाई गई।
श्रीकांत परिहार (परिसर रक्षक): इन्होंने भी ₹4,50,000 की राशि DFO तक पहुंचाने की बात स्वीकार की है।
अफसर का बड़ा खुलासा: “मेरे साइन फर्जी हैं”
Chhattisgarh Cow Dung Scam:इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब नवीन निराला (तत्कालीन उप प्रबंध संचालक) ने सामने आकर कहा— “प्रमाणक में मेरे जो हस्ताक्षर हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं। मेरा ट्रांसफर 2023 में ही हो गया था, लेकिन किसी ने 2024 में मेरे नाम से साइन कर दिए।”
Chhattisgarh Cow Dung Scam:फिलहाल, इस ‘गोबर घोटाले’ ने छत्तीसगढ़ वन विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुँच चुकी है और जांच की आंच बड़े अफसरों तक पहुँचनी तय मानी जा रही है। अब देखना यह है कि क्या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?



















