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बिलासपुर

RTE में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया?

बिलासपुर: शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया? छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत हो रही गड़बड़ियों पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने राज्य के शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र (हलफनामा) दाखिल कर जवाब देने का आदेश दिया है।

ज्वाइंट सेक्रेटरी के जवाब से असंतुष्ट हुआ कोर्ट

यह आदेश तब आया जब विभाग के एक ज्वाइंट सेक्रेटरी द्वारा पेश किए गए जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट नजर आया। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि प्रदेश भर में बिना मान्यता के चल रहे नर्सरी स्कूलों (KG-1, KG-2) के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है? इस पर विस्तृत और संतोषजनक जानकारी मांगी गई है।शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया?

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ज्वाइंट सेक्रेटरी का जवाब पर्याप्त नहीं है और अब विभाग के सर्वोच्च अधिकारी, यानी शिक्षा सचिव को स्वयं इस मामले में जवाबदेही लेनी होगी।शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया?

अवैध नर्सरी स्कूलों पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे नर्सरी स्कूलों और उनमें हो रहे दाखिलों में गड़बड़ी को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। उल्लेखनीय है कि यह मामला सीधे चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में लगा था, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया?

अब इस मामले में शिक्षा सचिव को एक विस्तृत हलफनामा पेश कर कोर्ट को यह बताना होगा कि उन्होंने इन अवैध स्कूलों के संचालन को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। कोर्ट के इस सख्त रवैये से शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है और उम्मीद है कि अब इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी।शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा, पूछा- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर क्या एक्शन लिया?

Dr. Tarachand Chandrakar

Editor-in-Chief

डॉ. ताराचंद चंद्राकर एक प्रखर विचारक और अनुभवी पत्रकार हैं, जो 'निडर छत्तीसगढ़' के माध्यम से निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। तथ्यों की शुद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में एक विश्वसनीय नाम बनाया है।

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