“मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं…” सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त! कलेक्टर के पास पहुंचा ‘गबन’ और ‘गुंडई’ का कच्चा-चिट्ठा

कोरबा/पाली: “मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं…” सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त! कलेक्टर के पास पहुंचा ‘गबन’ और ‘गुंडई’ का कच्चा-चिट्ठा. क्या एक सरकारी कर्मचारी इतना ताकतवर हो सकता है कि वह खुलेआम कहे— “मैं पैसे देकर आया हूं, जैसी मर्जी वैसा काम करूंगा?” छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली ब्लॉक से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम पंचायत डोंड़की के सचिव जुगुल श्रीवास की मनमानी और तानाशाही से तंग आकर अब पूरा गांव, पंच और सरपंच लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों ने सीधे जिला कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया है और सचिव को तत्काल हटाने की मांग की है।
“जहाँ शिकायत करनी है कर लो, पैसा देकर आया हूँ”
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि सचिव जुगुल श्रीवास का रवैया किसी तानाशाह से कम नहीं है। जब भी उनसे घटिया निर्माण कार्य या अनुपस्थिति पर सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब होता है— “मैं जनपद से लेकर जिला स्तर तक पैसा खिलाकर काम लाया हूं। मेरा जैसा मन होगा, वैसा काम करूंगा। आप लोगों को जहां शिकायत करनी है, कर लो।” सचिव के इस बड़बोलेपन ने पंचायत के पंचों के आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाई है। उनका कहना है कि सचिव के राज में पंचों का कोई वजूद ही नहीं बचा है।सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त!
पंचायत भवन में ताला, घर के चक्कर काटते ग्रामीण
कलेक्टर को सौंपी गई शिकायत में बताया गया है कि सचिव जुगुल श्रीवास ग्राम सभा के दिन के अलावा पंचायत भवन में झांकते तक नहीं हैं। कार्यालय में अक्सर ताला लटका रहता है।सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त!
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जाति या निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्रामीणों को सचिव के निजी घर के 4-5 चक्कर काटने पड़ते हैं।
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फोन करने पर सचिव कॉल रिसीव नहीं करते।
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शासकीय योजनाओं और आय-व्यय का ब्यौरा मांगने पर जानकारी गोलमोल कर दी जाती है।
सीधी-सादी महिला सरपंच का उठा रहे फायदा
डोंड़की की वर्तमान सरपंच श्रीमती प्रमिला पैकरा हैं, जो पहली बार इस पद पर चुनी गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच अभी नई हैं और सीधी-सादी हैं, जिसका सचिव जुगुल श्रीवास भरपूर नाजायज फायदा उठा रहे हैं। एक सचिव का काम सरपंच को सही मार्गदर्शन देना होता है, लेकिन यहाँ सचिव ही ‘सुपर सरपंच’ बनकर बैठा है और सरपंच को गुमराह कर रहा है।सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त!
लाखों के वारे-न्यारे और ‘जुगाड़’ से वापसी
यह पहली बार नहीं है जब सचिव जुगुल विवादों में हैं। सूत्रों के मुताबिक:
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पुराना रिकॉर्ड खराब: पिछले कार्यकाल में भी उन पर मूलभूत, 14वें और 15वें वित्त आयोग की लाखों रुपये की राशि में हेराफेरी (गबन) के आरोप लगे थे।
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जुगाड़ से पोस्टिंग: शिकायतों के बाद उन्हें दूर दराज के इलाके में ट्रांसफर कर दिया गया था। लेकिन अपनी ऊंची पहुँच और ‘जुगाड़’ के दम पर वे कुछ ही महीनों में वापस अपने गृहग्राम पटपरा के पास स्थित डोंड़की पंचायत में पोस्टिंग कराने में सफल हो गए।
अब कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट और मनमानी करने वाले सचिव को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, उनके द्वारा कराए गए कार्यों की गुणवत्ता की जांच हो और किसी जिम्मेदार व्यक्ति को पंचायत की कमान सौंपी जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस ‘बाहुबली’ सचिव पर क्या कार्रवाई करता है।सचिव की तानाशाही से पूरा गांव त्रस्त!









