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सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

By Nidar Chhattisgarh Desk

Published on: August 20, 2025

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सड़क नहीं तो कांवड़ बनी 'एंबुलेंस', गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

सरगुजा। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म, छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिले सरगुजा से एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां लुण्ड्रा ब्लॉक के एक गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को उसके परिजन कांवड़ (लकड़ी के डंडे पर कपड़ा या खाट बांधकर बनाई गई डोली) पर लिटाकर अस्पताल ले जा रहे थे। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने रास्ते में एक बच्चे को जन्म दे दिया।

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गनीमत रही कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो सरकारी विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

क्या है पूरा मामला?

यह मामला सरगुजा जिले के लुण्ड्रा ब्लॉक अंतर्गत आने वाले रवई जटासेमर गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क और पुल-पुलिया न होने के कारण एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन वहां तक नहीं पहुंच सकता था। समय बीतता जा रहा था और महिला की तकलीफ बढ़ती जा रही थी। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

ऐसी विकट परिस्थिति में परिजनों ने समय न गंवाते हुए एक देसी जुगाड़ का सहारा लिया। उन्होंने बांस और कपड़े की मदद से एक कांवड़ तैयार की और उस पर महिला को लिटाकर उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों से अस्पताल के लिए पैदल ही निकल पड़े। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

रास्ते में गूंजी किलकारी

परिजनों को महिला को लेकर लगभग 2 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना था। इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इस घटना ने जहां एक ओर परिवार को खुशी दी, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था की लाचारी को भी उजागर कर दिया। बाद में किसी तरह मां और नवजात को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

विकास के दावों की जमीनी हकीकत

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इस क्षेत्र में सड़क, पुल और पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, खासकर बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब नदी-नाले उफान पर होते हैं। पहले भी कई बार मरीजों को इसी तरह खाट या कांवड़ पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया है। ये तस्वीरें सरकार के उन दावों की जमीनी हकीकत बयां करती हैं, जिनमें दूर-दराज के गांवों तक विकास पहुंचाने की बात कही जाती है। इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर प्रशासन और सरकार को आईना दिखाया है कि आखिर कब तक ग्रामीण इलाकों के लोगों को ऐसी जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। सड़क नहीं तो कांवड़ बनी ‘एंबुलेंस’, गर्भवती ने 2KM के सफर में रास्ते में ही बच्चे को दिया जन्म

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Nidar Chhattisgarh Desk

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