
नई दिल्ली: ‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’, देश की सर्वोच्च अदालत ने मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देशभर की जेलों में बंद उन सभी कैदियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है, जो अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं। कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि सजा पूरी होने के बाद किसी भी व्यक्ति को एक दिन भी अतिरिक्त जेल में रखना उसके जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है।
यह आदेश उन हजारों कैदियों के लिए उम्मीद की किरण है जो कानूनी प्रक्रिया की सुस्ती या प्रशासनिक लापरवाही के कारण अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
क्यों की सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी?
यह मामला याचिकाकर्ता सुखदेव पहलवान की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुखदेव की 20 साल की सजा इसी साल मार्च में पूरी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे रिहा नहीं किया गया। इस पर उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने प्रशासनिक रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, “अगर प्रशासन का ऐसा रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
एक और कड़वी सच्चाई: जमानत के बाद भी 25,000 कैदी जेल में
यह समस्या सिर्फ सजा पूरी कर चुके कैदियों तक ही सीमित नहीं है। ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह बात भी सामने आई कि देश की जेलों में लगभग 25,000 कैदी ऐसे हैं, जिन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन वे जमानत की शर्तें (जैसे- मुचलके की रकम या जमानती का इंतजाम) पूरी न कर पाने के कारण रिहा नहीं हो पा रहे हैं।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
सभी राज्यों के गृह सचिवों को निर्देश जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भेजी जाए। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि यह आदेश सभी विधिक सेवा प्राधिकरणों तक भी पहुंचे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई भी कैदी अपनी सजा से अधिक समय तक जेल में तो नहीं है।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
हालांकि, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जेल प्रशासन ने दावा किया है कि उनके राज्यों में ऐसा कोई मामला नहीं है, जबकि राजस्थान में जानकारी जुटाई जा रही है।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
रिव्यू बोर्ड को भी लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता सुखदेव के मामले में सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 29 जुलाई को ही सुखदेव को रिहा करने का आदेश दिया गया था, लेकिन बोर्ड ने ‘आचरण’ का हवाला देकर रिहाई को टाल दिया था। इस पर बेंच ने सवाल किया कि यह कैसा बर्ताव है।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’
यह फैसला जेलों में बंद उन अनगिनत लोगों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है जो सिस्टम की खामियों का शिकार होकर अपनी आजादी से वंचित हैं।‘प्रशासन का रवैया रहा तो दोषी जेल में ही मर जाएगा’



















