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मध्यप्रदेश

कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम, 62 हजार करोड़ का बकाया; हर रोज चुकाना पड़ रहा 14 करोड़ रुपये ब्याज

केंद्र से भुगतान में देरी और बढ़ते ब्याज ने बिगाड़ी निगम की वित्तीय सेहत, विधानसभा में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्वीकार किया संकट।

भोपाल (मध्य प्रदेश): कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम, 62 हजार करोड़ का बकाया; हर रोज चुकाना पड़ रहा 14 करोड़ रुपये ब्याज. मध्य प्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं और धान की खरीदी करने वाली सबसे अहम संस्था, ‘नागरिक आपूर्ति निगम’ (NAN), इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। स्थिति यह है कि निगम पर कुल देनदारी बढ़कर 62 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। इस भारी-भरकम कर्ज का असर यह है कि विभाग को रोजाना केवल ब्याज के रूप में ही 14 करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।

यह खुलासा मध्य प्रदेश विधानसभा में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विधायकों द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में किया।कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम

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हर साल बढ़ता गया कर्ज का बोझ
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विधानसभा में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी और अन्य सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए निगम को लगातार कर्ज लेना पड़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्ज का ग्राफ तेजी से बढ़ा है:

  • मार्च 2021: 37,381 करोड़ रुपये

  • मार्च 2022: 44,612 करोड़ रुपये

  • मार्च 2023: 39,442 करोड़ रुपये

  • मार्च 2024: 35,998 करोड़ रुपये

  • 13 नवंबर 2025 तक: कुल देनदारी 62,944 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

बकाया राशि बढ़ने के कारण ब्याज की देनदारी भी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है, जो अब राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर बड़ा बोझ बन चुकी है।कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम

भुगतान अटकने की असल वजह: केंद्र से देरी और क्वालिटी की समस्या
इस वित्तीय संकट के पीछे का मुख्य कारण केंद्र सरकार से खाद्यान्न भुगतान का समय पर न मिलना बताया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भुगतान अटकने के पीछे ‘गुणवत्ता’ (Quality) भी एक बड़ा मुद्दा है।कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम

  1. FCI द्वारा रिजेक्शन: कई बार किसानों के दबाव में ऐसी उपज खरीद ली जाती है जो निर्धारित मापदंडों (FAQ) पर खरी नहीं उतरती। भारतीय खाद्य निगम (FCI) ऐसी उपज को लेने से मना कर देता है।

  2. सेंट्रल पूल की शर्त: जब तक केंद्र सरकार खाद्यान्न को ‘सेंट्रल पूल’ में स्वीकार नहीं करती और राशि जारी नहीं करती, तब तक नागरिक आपूर्ति निगम को अपने स्तर पर ही ब्याज का बोझ उठाना पड़ता है।

  3. 10% राशि का नियम: भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने पर भी अंतिम लेखा-जोखा (Final Settlement) के लिए कुल राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा रोक लिया जाता है, जिससे नकदी का प्रवाह बाधित होता है।

केंद्र से गुहार: जल्द जारी हो भुगतान
इस वित्तीय चक्रव्यूह से निकलने के लिए राज्य सरकार अब केंद्र की ओर देख रही है। सरकार ने केंद्र से मांग की है कि लंबित भुगतान को जल्द से जल्द जारी किया जाए। विभाग का मानना है कि भुगतान मिलने से ब्याज के बोझ में कमी आएगी और आगामी रबी और खरीफ सीजन में किसानों से उपज खरीदी की प्रणाली सुचारू रूप से चलाई जा सकेगी।कर्ज के दलदल में नागरिक आपूर्ति निगम

Dr. Tarachand Chandrakar

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