Indore Water Crisis: इंदौर में मातम: दूषित पानी ने ली 16 जान, 6 साल पहले मिली चेतावनी को प्रशासन ने किया अनसुना

Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस त्रासदी ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्षों पहले ही चेतावनी दी थी कि शहर का भूजल पीने लायक नहीं है, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
2018 के सर्वे में ही हो गया था ‘खतरे का खुलासा’
Indore Water Crisis: इंदौर के भूजल की स्थिति कितनी भयावह है, इसका पता 2018 में ही चल गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के 60 अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने लिए थे, जिनमें से 59 स्थानों के सैंपल दूषित पाए गए थे। बोर्ड ने 2022 तक तीन बार नगर निगम और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को लिखित चेतावनी भेजी थी कि इस पानी का उपयोग न किया जाए। इसके बावजूद, वर्षों बीत जाने के बाद भी जमीन स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ और जनता को मौत के मुँह में धकेल दिया गया।
औद्योगिक कचरा और अवैध फैक्ट्रियां बनीं ‘काल’
Indore Water Crisis: जांच में सामने आया है कि औद्योगिक क्षेत्रों में निकलने वाले खतरनाक वेस्ट (Industrial Waste) को सीधे ड्रेनेज लाइनों में छोड़ दिया जाता है। भागीरथपुरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई अवैध फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जहाँ कचरे के निपटान की कोई सही व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि नर्मदा जल की लाइनों में भी दूषित पानी मिलने की आशंका जताई जा रही है। 2016 से 2018 के बीच हुई जांच की रिपोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि शहर का पानी जहर बन चुका है।
जानलेवा बैक्टीरिया: शरीर के अंगों पर कर रहा है सीधा हमला
Indore Water Crisis: सूत्रों के मुताबिक, पानी के सैंपल्स में ‘टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ (Total Coliform Bacteria) की पुष्टि हुई है। यह बैक्टीरिया ड्रेनेज के पानी के संपर्क से फैलता है और सीधे इंसानी आंतों पर हमला करता है। इससे डायरिया और पेट की गंभीर बीमारियां होती हैं, जो अंततः जानलेवा साबित हो रही हैं। कान्ह नदी के आसपास के इलाकों में भी इसी तरह का खतरा मंडरा रहा है।
सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन: कई बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज
Indore Water Crisis: इस बड़ी लापरवाही पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर इंदौर नगर निगम के आला अफसरों पर कार्रवाई की गई है:
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निलंबन: अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जल कार्य शाखा के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
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नई तैनाती: स्थिति को संभालने के लिए तीन अनुभवी आईएएस (IAS) अफसरों – आकाश सिंह, प्रखर सिंह और आशीष कुमार पाठक को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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बर्खास्तगी: जोनल अधिकारी और सहायक यंत्रियों के खिलाफ भी निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है।
जनता में आक्रोश और दहशत का माहौल
Indore Water Crisis: भागीरथपुरा के लोग अब भी दहशत में हैं। कई बच्चे और बुजुर्ग अस्पतालों में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने तब तक सुध नहीं ली जब तक कि लाशें नहीं गिरने लगीं। प्रशासन की इस बेपरवाही ने इंदौर जैसे ‘स्वच्छ शहर’ के माथे पर एक गहरा कलंक लगा दिया है।









