सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां, बोरी में भरकर कोचियों को बेची जा रही शराब

सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में सरकारी शराब दुकानों की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। ताजा मामला हथबंद स्थित शासकीय शराब दुकान से सामने आया है, जहाँ नियमों को दरकिनार कर अवैध तरीके से शराब की थोक बिक्री की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने आबकारी विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
हथबंद शराब दुकान का वीडियो वायरल: नियमों की खुलेआम अनदेखी
सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि शराब दुकान के कर्मचारी कथित तौर पर कोचियों (थोक खरीदारों) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति को प्लास्टिक की बोरी में भरकर भारी मात्रा में देशी मसाला शराब ले जाते दिखाया गया है। जानकारी के अनुसार, एक ही व्यक्ति को 200 पाव से अधिक शराब दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
क्या कहता है आबकारी नियम?
सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,शासन के दिशा-निर्देशों और आबकारी नियमों के अनुसार, किसी भी ग्राहक को एक समय में 20 पाव से अधिक शराब बेचने की अनुमति नहीं है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि अवैध भंडारण और कोचियागिरी (अवैध बिक्री) पर रोक लग सके। हालांकि, हथबंद की इस दुकान में नियमों को ताक पर रखकर कोचियों को ‘VIP सर्विस’ दी जा रही है।
पुलिस और आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,इस पूरी घटना ने स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार शिकायतें होने और पुख्ता वीडियो साक्ष्य सामने आने के बावजूद, अब तक विभाग द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इस निष्क्रियता से स्थानीय ग्रामीणों और आम जनता में भारी आक्रोश है। लोग अब यह देख रहे हैं कि खबर वायरल होने के बाद क्या दोषियों पर कोई गाज गिरेगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
विवादों का पुराना नाता: मारपीट और ओवररेटिंग की शिकायतें
हथबंद की यह शराब दुकान विवादों के लिए नई नहीं है। इससे महज एक दिन पहले ही यहाँ के कर्मचारियों पर ग्राहकों के साथ मारपीट का आरोप लगा था। ग्राहकों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने शराब की ‘ओवररेटिंग’ (तय कीमत से अधिक वसूली) का विरोध किया था। उस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर प्रसारित हुआ था।
प्रशासनिक साख दांव पर
सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली को संदिग्ध बना दिया है। क्या कर्मचारी अपनी मर्जी से यह सब कर रहे हैं या उन्हें किसी ऊंचे स्तर से संरक्षण प्राप्त है? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या शासन इन भ्रष्ट कर्मचारियों और अवैध कारोबारियों पर नकेल कस पाता है या नहीं।
सरकारी शराब दुकान में नियमों की धज्जियां,यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं और वायरल वीडियो के आधार पर तैयार किया गया है। हमारा उद्देश्य प्रशासन का ध्यान नियमों के उल्लंघन की ओर आकर्षित करना है।


















