
MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा? जानिए मेडिकल कॉलेजों में चल रहे इस बड़े झांसे की सच्चाई
मुख्य बिंदु:
छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के नाम पर सक्रिय हुए एजेंट।
WhatsApp Group Join NowFacebook Page Follow NowYouTube Channel Subscribe NowTelegram Group Follow NowInstagram Follow NowDailyhunt Join NowGoogle News Follow Us!मैनेजमेंट कोटे की सीट 1 करोड़ में बुक करने का दावा, जबकि स्टेट और मैनेजमेंट कोटे की फीस है समान।
एजेंटों का असली निशाना NRI कोटे की सीटें, छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने की कोशिश।
रायपुर: MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?, डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए यह खबर एक चेतावनी है। छत्तीसगढ़ में निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होते ही एडमिशन एजेंटों का गिरोह सक्रिय हो गया है। ये एजेंट छात्रों को मैनेजमेंट कोटे की सीट एक करोड़ रुपये में दिलाने का झांसा दे रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और ही है।
क्या है “एक करोड़ वाली सीट” का सच?
एजेंट छात्रों और अभिभावकों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि वे मैनेजमेंट कोटे की सीट एक करोड़ रुपये में “बुक” करा सकते हैं। लेकिन यह एक सफेद झूठ है। छत्तीसगढ़ के मेडिकल प्रवेश नियमों के अनुसार, निजी कॉलेजों में स्टेट कोटा और मैनेजमेंट कोटा, दोनों की ट्यूशन फीस एक समान है। कॉलेज प्रबंधन ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्ट जैसे अन्य शुल्कों को मिलाकर लगभग 65 लाख रुपये तक वसूलते हैं, लेकिन मैनेजमेंट कोटे के लिए कोई अलग से करोड़ों की फीस का प्रावधान नहीं है।MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?
तो फिर कहां है असली खेल? निशाना NRI कोटा
दरअसल, मैनेजमेंट कोटे का झांसा देकर एजेंटों का असली निशाना NRI कोटे की सीटें हैं। ये एजेंट अभिभावकों से 5 लाख रुपये एडवांस लेकर NRI कोटे की सीट सवा करोड़ रुपये तक में पक्की कराने का दावा करते हैं। वे एक ऐसा माहौल बनाते हैं जिससे लगे कि बिना उनकी मदद के सीट मिलना नामुमकिन है। यह पूरा खेल छात्रों की मजबूरी और जानकारी की कमी का फायदा उठाने के लिए रचा गया है।MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?
बिना मेरिट के एडमिशन असंभव: यह नियम जानना जरूरी
छात्रों और अभिभावकों को यह समझना बेहद जरूरी है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का एकमात्र आधार NEET-UG की मेरिट सूची है। चाहे वह स्टेट कोटा हो, मैनेजमेंट कोटा हो या NRI कोटा, हर सीट के लिए छात्र का NEET क्वालिफाइड होना और काउंसलिंग की मेरिट सूची में नाम होना अनिवार्य है। एजेंटों के पास किसी को सीधे प्रवेश दिलाने का कोई अधिकार नहीं है।MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और NRI कोटे के नियम
मेडिकल सीटों की इस तरह की “बिक्री” पर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त टिप्पणी कर चुका है। पंजाब-हरियाणा के एक मामले में कोर्ट ने कहा था कि दूर के रिश्तेदारों को NRI कोटे में प्रवेश देना सीटें बेचने जैसा है। छत्तीसगढ़ के नियमों के अनुसार, NRI कोटे में प्रवेश के लिए छात्र का दो पीढ़ी तक का खून का रिश्ता होना चाहिए, जैसे- माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-मामा, दादा-दादी, नाना-नानी आदि। इसके लिए तहसीलदार द्वारा जारी किया गया ‘वंशावली प्रमाणपत्र’ भी अनिवार्य है। प्रदेश के 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे की कुल 103 सीटें हैं।MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?
विशेषज्ञ की चेतावनी: दलालों के झांसे में न आएं
हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और रिटायर्ड डीएमई डॉ. एके चंद्राकर ने आगाह करते हुए कहा, “मेडिकल एडमिशन में एजेंटों का झांसा देना कोई नई बात नहीं है। अभिभावक दलालों के चक्कर में पड़कर अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं और छात्र का कीमती साल भी बर्बाद होता है। प्रदेश में मेडिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और छात्रों को केवल आधिकारिक प्रक्रिया पर ही भरोसा करना चाहिए।”MBBS एडमिशन का खेल: छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में सीट का सौदा?



















