सुकमा में विकास की नई किरण: मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने बदली सुदूर वनांचलों की सूरत

सुकमा में विकास की नई किरण: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। कभी नक्सलवाद और दुर्गम रास्तों के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों में अब विकास के पहिये दौड़ रहे हैं। माओवाद के प्रभाव में कमी और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता होने के साथ ही, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने ग्रामीणों के जीवन को सुगम बना दिया है। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी है—मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना।
नक्सलवाद के साये से बाहर निकलता सुकमा: अब पैदल नहीं, बस से होगा सफर
एक समय था जब सुकमा के सुदूर गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में कैद रहने को मजबूर थे। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलियों के डर के कारण लोग मुख्य मार्गों तक आने से कतराते थे। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। कोंटा विकासखंड के लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे गांवों के लोग अब निर्भय होकर दोरनापाल और अन्य शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
पूर्व में इन ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुँचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता था। ग्राम लखापाल के निवासी कूड़ाम जोगा बताते हैं कि बस सेवा न होने के कारण पहले उन्हें पैदल चलना पड़ता था, जिससे पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब नियमित बस सेवा शुरू होने से समय की बचत हो रही है और जरूरी काम आसानी से पूरे हो रहे हैं।
कनेक्टिविटी से सुदृढ़ होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित बसें अब पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजर रही हैं। इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ समाज के हर वर्ग को मिल रहा है:
विद्यार्थी: अब छात्र उच्च शिक्षा के लिए शहरों तक आसानी से पहुँच पा रहे हैं।
महिलाएं और बुजुर्ग: सुरक्षित और सुलभ परिवहन से महिलाओं और बुजुर्गों को आवागमन में आसानी हुई है।
श्रमिक और व्यापारी: स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुँचाना अब पहले से कहीं अधिक सरल हो गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
सुरक्षा और विश्वास का नया वातावरण
सुकमा में विकास की नई किरण:इरकमपल्ली के निवासी मोहनरंजन ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, यह योजना केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। सुरक्षा के मोर्चे पर मिली सफलता के बाद अब विकास कार्यों ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।
प्रशासनिक पहल: सब्सिडी और टैक्स में छूट
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, जिले के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 10 बसों का सफल संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, 5 ‘हक्कुम मेल’ बसें भी सेवा में लगी हुई हैं।
शासन द्वारा बस ऑपरेटरों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं:
बस संचालन के लिए शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
परिवहन को बढ़ावा देने हेतु 3 वर्षों के लिए रोड टैक्स में पूर्ण छूट दी गई है।
प्रगति की ओर बढ़ता सुकमा
सुकमा में विकास की नई किरण:मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना आज सुकमा जिले में विश्वास, सुरक्षा और विकास का पर्याय बन चुकी है। नक्सलवाद के अंधकार को पीछे छोड़कर यह क्षेत्र अब आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। सुगम परिवहन ने न केवल दूरियों को कम किया है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के नए द्वार खोल दिए हैं।



















