GPM: मड़ई की जमीन, सेखवा का NOC और फाइल से दस्तावेज गायब! मरवाही SDM कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। GPM: मड़ई की जमीन, सेखवा का NOC और फाइल से दस्तावेज गायब! मरवाही SDM कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मरवाही अनुभाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मड़ई की एक बेशकीमती जमीन के डाइवर्सन में बड़ी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का डाइवर्सन किया गया, उसकी फाइल से महत्वपूर्ण दस्तावेज ही नदारद हैं।
क्या है पूरा मामला? मड़ई की जमीन और सेखवा का कनेक्शन
मड़ई की जमीन,यह पूरा प्रकरण तहसील सकोला के ग्राम पंचायत मड़ई से जुड़ा है। यहाँ स्थित खसरा नंबर 236/7, रकबा 2.023 हेक्टेयर की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में बेबीलता (पति शंकर प्रसाद) के नाम पर दर्ज है। आरोप है कि वर्ष 2022 में इस भूमि का डाइवर्सन नियमों को ताक पर रखकर किया गया।
नियमों के मुताबिक, किसी भी भूमि के डाइवर्सन के लिए संबंधित ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में एक अजीबोगरीब विरोधाभास सामने आया है। जमीन मड़ई पंचायत में स्थित है, जबकि डाइवर्सन के आदेश में ‘ग्राम पंचायत सेखवा’ में उद्घोषणा प्रकाशन का उल्लेख किया गया है।
फाइल से गायब हैं महत्वपूर्ण दस्तावेज
मड़ई की जमीन,इस संदिग्ध डाइवर्सन मामले ने तब तूल पकड़ा जब सूचना के अधिकार या नकल के माध्यम से दस्तावेजों की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस डाइवर्सन से संबंधित कोई वैध ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) मौजूद ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि तत्कालीन मरवाही SDM ने किस आधार पर डाइवर्सन आदेश जारी कर दिया? क्या बिना NOC और गलत पंचायत में उद्घोषणा के डाइवर्सन करना विभागीय मिलीभगत का हिस्सा है?
विवादों के केंद्र में ‘शंकर प्रजापति’ और रसूख का खेल
मड़ई की जमीन,इस विवादित भूमि की स्वामी बेबीलता प्रजापति के पति शंकर प्रजापति पेशे से शिक्षक बताए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शंकर प्रजापति का नाम पहले भी जमीन से जुड़े विभिन्न विवादों में आता रहा है। चर्चा है कि सरकारी जमीनों को निजी बताकर उन पर बैंकों से मोटा कर्ज लेने के प्रयास भी किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुख्ता जांच होना अभी बाकी है।
राजस्व विभाग की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश
मड़ई की जमीन,मरवाही SDM कार्यालय की इस कार्यशैली ने पूरे जिले के राजस्व विभाग की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यालय के कुछ रसूखदार कर्मचारियों की शह पर ही यह ‘कागजी खेल’ खेला गया है। ग्रामीणों ने अब इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच से खुलेगी सिस्टम की पोल?
यह मामला सिर्फ एक जमीन के टुकड़े का नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही का है। अगर मड़ई की जमीन का डाइवर्सन सेखवा पंचायत के फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर हुआ है, तो यह कूट रचना (Forgery) की श्रेणी में आता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करता है या फाइलों की तरह इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।
मड़ई की जमीन, GPM जिले में भू-राजस्व के मामलों में बढ़ती अनियमितताएं प्रशासन के लिए चुनौती बन गई हैं। मरवाही का यह डाइवर्सन केस यदि गहराई से जांचा जाए, तो कई बड़े चेहरों पर आंच आ सकती है



















