गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय, आयुर्वेद-योग में हजारों नौकरियों का रास्ता साफ, जानें इसकी खासियतें

गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय, आयुर्वेद-योग में हजारों नौकरियों का रास्ता साफ, जानें इसकी खासियतें
Gorakhpur Ayush University:गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। गोरखपुर के पिपराइच में उत्तर भारत के पहले आयुष विश्वविद्यालय, ‘महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय’ का भव्य उद्घाटन किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अत्याधुनिक संस्थान को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
यह विश्वविद्यालय न केवल पूर्वांचल, बल्कि पूरे उत्तर भारत में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय
क्यों है यह विश्वविद्यालय इतना खास?
यह सिर्फ एक और यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का एक बड़ा केंद्र है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, “यह विश्वविद्यालय ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को पूरा करेगा और गोरखपुर को आयुष शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का एक नया हब बनाएगा।” वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “आयुष भारत की प्राचीन विरासत है और यह विश्वविद्यालय इस विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाएगा।”गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय
एक नजर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय
स्थान: पिपराइच, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
कुल लागत: लगभग ₹300 करोड़
कैंपस क्षेत्र: 52 एकड़ में फैला विशाल और हरा-भरा कैंपस
संबद्ध संस्थान: प्रदेश के लगभग 90 आयुष कॉलेज अब इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे।
प्रमुख पाठ्यक्रम: आयुर्वेद (BAMS), होम्योपैथी (BHMS), यूनानी (BUMS), योग, सिद्ध और इनसे जुड़े रिसर्च प्रोग्राम।
अत्याधुनिक सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर
इस विश्वविद्यालय को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यहाँ छात्रों और शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी:
स्मार्ट एजुकेशन: डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब और स्मार्ट क्लासरूम।
रिसर्च का केंद्र: पारंपरिक दवाओं और जड़ी-बूटियों पर वैज्ञानिक शोध के लिए विशेष रिसर्च विंग।
हॉस्टल और अन्य सुविधाएं: छात्रों और छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, ऑडिटोरियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स।
टेलीमेडिसिन: डिजिटल आयुष सेवाओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सलाह पहुँचाने की सुविधा।
युवाओं और प्रदेश के लिए कैसे बदलेगा भविष्य?
इस विश्वविद्यालय के शुरू होने से प्रदेश और खासकर युवाओं के लिए विकास के नए दरवाजे खुलेंगे:
रोजगार के अवसर: आयुष डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और शोधकर्ताओं के लिए हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी।
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा: उच्च गुणवत्ता वाले इलाज और वेलनेस प्रोग्राम के लिए देश-विदेश से लोग यहां आएंगे।
स्टार्टअप इकोसिस्टम: युवाओं को आयुष हेल्थकेयर, हर्बल प्रोडक्ट्स और वेलनेस स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: अब तक अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध आयुष कॉलेजों की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी।
यह विश्वविद्यालय पारंपरिक ज्ञान को सम्मान देने और उसे रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।गोरखपुर में खुला उत्तर भारत का पहला आयुष विश्वविद्यालय



















