हिरासत में मोबाइल फोन न दिखाना ‘असहयोग’ नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश: हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि आरोपी द्वारा पुलिस को हिरासत के दौरान मोबाइल फोन न देना ‘असहयोग’ नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत आरोपी को यह अधिकार प्राप्त है।
यह निर्णय जस्टिस डॉ. वी.आर.के. कृपा सागर की एकल पीठ द्वारा पूर्व सांसद एन. सुरेश बाबू और व्यवसायी अवुतु श्रीनिवास रेड्डी की जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान लिया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने YSRCP के साथ मिलकर TDP कार्यालय में जबरन प्रवेश किया और वहां हिंसा की। हिरासत में मोबाइल फोन न दिखाना ‘असहयोग’ नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
राज्य ने जमानत का विरोध करते हुए यह तर्क दिया कि बाबू ने पुलिस को अपना मोबाइल फोन नहीं सौंपा, जो कि जांच के लिए महत्वपूर्ण था। न्यायालय ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को जबरन अपना मोबाइल या डिजिटल डिवाइस का पासवर्ड देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। हिरासत में मोबाइल फोन न दिखाना ‘असहयोग’ नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के लिए अन्य साधनों का उपयोग करना चाहिए और केवल मोबाइल फोन न देने को ‘असहयोग’ नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने यह भी देखा कि याचिकाकर्ताओं का पुराना रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि वे कानून से भागने की कोशिश नहीं करेंगे, इसलिए उन्हें जमानत देना उचित है।
केस टाइटल: अवुथु श्रीनिवास रेड्डी बनाम स्टेशन हाउस अधिकारी (आपराधिक याचिका नंबर 6295 और 6306 वर्ष 2024) हिरासत में मोबाइल फोन न दिखाना ‘असहयोग’ नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट



















