राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर विशेष: शिक्षक नहीं, फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
रायपुर में गुमनाम नायक कर रहे कमाल, योग से लेकर फ्री कोचिंग और कला तक, कर रहे समाज को सशक्त दिशा

**रायपुर: मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर जानें उन नायकों को, जो समाज में शिक्षा और कौशल विकास को दे रहे नई## राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर विशेष: शिक्षक नहीं, फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर!
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, जो भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, हमें उन सभी लोगों के योगदान को याद करने का अवसर देता है जो शिक्षा के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी ऐसे कई शख्सियत हैं, जो भले ही पेशे से शिक्षक न हों, लेकिन अपने प्रयासों से समाज में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
खुद योग सीखा, अब बना रहे दूसरों को आत्मनिर्भर: छगन लाल सोनवानी
सरकारी शिक्षक के पद से करीब सालभर पहले सेवानिवृत्त हुए छगन लाल सोनवानी अब योगगुरु के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे भनपुरी स्कूल में सुबह आसपास के लोगों को योगाभ्यास कराते हैं। श्री सोनवानी बताते हैं कि पहले उन्होंने खुद इस विधा में पारंगत हासिल की, फिर युवाओं को इससे जोड़ा। अभी तक 5 हजार से ज्यादा लोगों को योगाभ्यास सिखाने के साथ-साथ प्रदेश में 105 लोगों को योग मार्गदर्शक मंडल से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। उनके सिखाए हुए कई युवा आज प्राइवेट स्कूलों में योग शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
सरकारी स्कूलों के बच्चों को फ्री कोचिंग: शीला चक्रवर्ती
पचपेड़ी नाका स्थित गुरुमुख सिंह नगर के आसपास की बस्ती के बच्चों को विगत 20 साल से शीला चक्रवर्ती निशुल्क कोचिंग दे रही हैं। हरफिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
रायपुर: समाज को शिक्षा से जोड़ने के लिए सिर्फ शिक्षक ही नहीं होते, बल्कि कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने सरोकार से जुड़कर शिक्षा की अलख जगाने में अहम कड़ी के रूप में काम करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौके पर ऐसे ही गुमनाम नायकों की बात करना जरूरी हो जाता है, जो अपने-अलग-अलग क्षेत्रों में हुनर सिखाकर युवाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। यह दिन देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। रायपुर शहर में कई ऐसे लोग हैं जो वर्तमान दौर में भी उनके इस विजन को सार्थक बनाने का प्रयास कर रहे हैं।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
खुद योग सीखा, अब बना रहे आत्मनिर्भर
करीब सालभर पहले सरकारी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए छगन लाल सोनवानी अब योगगुरु के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। वे आज भी भनपुरी स्कूल में सुबह आसपास रहने वाले लोगों को योगाभ्यास कराने के लिए पहुँच जाते हैं। श्री सोनवानी ने पहले खुद योग की विधा में साल वे अपने पारंगत हुए और फिर हजारों घर में ही सरकारी स्कूलों में पहली से 5वीं में युवाओं को इससे जोड़ा पढ़ने वाले बच्चों को। अभी तक पढ़ना-लिखना5 हजार सिखाती हैं। जिनके पास किताब- से ज्यादा लोगों कोकॉपी, पेन योगाभ्यास सिखा और पेंसिल नहीं होते, उन्हें भीने का दायित्व वे निभा चुके हैं। उन्होंने जरूरी सामग्री उपलब्ध करा प्रदेश में 1ती हैं। उनका05 लोगों को मानना है कि गरीबी योग मार्गदर्शक मंडल को केवल शिक्षा से से जोड़ने में अहम ही दूर किया जा भूमिका निभाई है, सकता है। शी जिनमें से कई योग शिक्षकला चक्रवर्ती ने अभी तक 60 से ज्यादा शा के रूप में प्राइवेट स्कूलों में अपनीला त्यागी बच्चों का दोबारा दाखिला कराने में मदद की है और उनके माता-पिता को सेवाएँ शिक्षा का महत्व समझाया है।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चोंाइंग-प को फ्री कोचिंगेंटिंग के साथ
पचपे वेस्ट से बना रहेड़ी नाका स्थित बेस्ट: नरेश वाढेर**
गुरुमुख सिंह नगर के आसपास की बस्तीशहर के नरेश वाढे के बच्चों को विगतर भले ही गुरु न हों, लेकिन 20 साल कला के प्रति उनका जुनून अद्वितीय है। उन्होंने अभी तक 200 से ज्यादा युवाओं को ड्राइंग-पेंटिंग की विधा में से शीला चक्रवर्ती फ्री कोचिंग दे पारंगत किया रही हैं। हर साल वे सरकारी स्कूलों में पहली है और उन्हें इससे आय अर्जित करने लायक बनाया है। नरेश अब युवाओं को “वेस्ट से 5वीं से बेस्ट” बनाने का हुनर सिखा रहे हैं। बाद में पढ़ने वाले बच्चों को अपने घर मेंाम के छिलके, टिशू पेपर, रद्दी ही पढ़ना-लिखना सिखाती हैं। जिन पेपर जैसी अनुपयोगी चीजों से नई बच्चों के पास किताब-कॉपी, चीजें बनाने की कला पेन और पेंसिल नहीं सीखने में युवा होते, उन्हें भी आवश्यक सामग्री उपलब्ध काफी कराती हैं। शीला जी दिलचस्पी ले का रहे हैं। कई युवा इस मानना है कि गरीबी को केवल शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने अभी तक 60 से ज्यादा शा काम से अपनी पढ़ाईला त्यागी बच्चों का दोबारा दाखिला कराने में मदद की है और उनके माता-पिता को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करती हैं। वह प्रतिदिन दो पाली में 20 से ज्यादा बच्चों को निशुल्क कोचिंग देती हैं और उनका होमवर्क भी कराती हैं।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर
ड्राइंग-प का खर्च भी निकालेंटिंग के साथ वेस्ट से बना रहे रहे हैं, जबकि बेस्ट
शहर के नरेश वाढेर भले ही पेशेवर गुरु न हों, लेकिन कुछ कला के लिए वे युवा ग्रुप बनाकर कॉलोनियों में लोगों जीते हैं। उन्होंने से ऑर्डर200 से लेकर आत्मनिर्भर ज्यादा बन रहे हैं। युवाओं को ड्राइंग
ये कहानियां-पेंटिंग दर्शा की विधा मेंती हैं कि शिक्षा पारंगत करने के और साथ-साथ इससे आय अर्जित करने लायक कौशल विकास केवल औपचारिक बनाया संस्थानों तक ही सीमित है। नरेश नहीं है युवाओं, बल्कि समाज के को वेस्ट हर कोने में ऐसे लोग मौजूद मटेरियल हैं जो अपने अन से “ूबेस्ट” चीजेंठे प्रयासों से सकारात्मक बनाने का हुनर बदलाव ला सिखा रहे हैं। रहे हैं। राष्ट्रीय बादाम के छ शिक्षा दिवस ऐसे गुमिलके, टिशनाम नायकों को सलामु पेपर, रद्दी पेपर जैसी कई करने का भी अवसर है।फिर भी जगा रहे शिक्षा की अलख, हुनर सिखाकर युवाओं को बना रहे आत्मनिर्भर









