
Patna NEET Aspirant Case Update: बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब पीड़िता की मां ने अस्पताल के उस मंजर और अपनी बेटी की आखिरी बातचीत का ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।(Patna Hostel Kand)
Patna Hostel Kand:हॉस्टल में हुई दरिंदगी की कहानी अब अस्पताल की नर्सों और मां के बयानों के जरिए सामने आ रही है। आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला।
“तोरा साथ कोई गलत करलउ हे का..?” – मां की बेबसी
Patna Hostel Kand:पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी Shambhu Girls Hostel में रहकर पढ़ाई कर रही थी। घटना के बाद जब वह अस्पताल में थी, तो 6 जनवरी को वह पूरा दिन बेहोश रही। लेकिन 7 जनवरी को जब उसे हल्का होश आया, तो मां ने अपनी स्थानीय भाषा (मगही) में उससे पूछा— “खइबहीं…कुछ मंगवा दिव..का होलउ हे बेटी, तोरा साथ कोई गलत करलउ हे का..?”
Patna Hostel Kand:मां के मुताबिक, यह सुनते ही पीड़िता फूट-फूटकर रोने लगी और उसने सिर हिलाकर इशारा किया कि उसके साथ गलत हुआ है। परिवार उस पल का वीडियो बनाना चाहता था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से हटा दिया।
Hospital की नर्स और जूनियर डॉक्टर ने किया था अलर्ट!
Patna Hostel Kand:इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा Prabhat Memorial Hospital के स्टाफ को लेकर हुआ है। पीड़िता की मां का दावा है कि वहां काम करने वाली एक नर्स और जूनियर डॉक्टर ने छिपकर उन्हें चेतावनी दी थी।
Patna Hostel Kand:नर्स ने कहा था— “बच्ची के साथ बहुत गलत हुआ है। क्या सीनियर डॉक्टर्स ने आपको कुछ नहीं बताया? अगर अपनी बच्ची की जान बचानी है, तो उसे तुरंत यहाँ से किसी दूसरे अस्पताल ले जाइए, वरना बहुत बुरा हो जाएगा।”
Case रफा-दफा करने का बनाया गया दबाव
Patna Hostel Kand:पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी बेटी को दूसरे हॉस्पिटल ले जाना चाहते थे, तो अस्पताल प्रशासन ने उसे डिस्चार्ज करने में देरी की। इसी बीच:
Hostel Operator ने परिवार पर पैसे लेकर मामला शांत करने का दबाव बनाया।
पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने 9 जनवरी को शिकायत मिलने के बाद भी Rape की आशंका को गंभीरता से नहीं लिया।
जब 8 जनवरी की रात बच्ची कोमा में चली गई, तब आनन-फानन में उसे डिस्चार्ज किया गया।
12 जनवरी को थम गईं सांसें
Patna Hostel Kand:कंकड़बाग के एक बड़े निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जनवरी को पीड़िता ने दम तोड़ दिया। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस और अस्पताल ने वक्त रहते कार्रवाई की होती और मेडिकल साक्ष्य (Evidence) नहीं छिपाए होते, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।



















