बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
प्रशासनिक उदासीनता की इंतहा: न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग, राहगीरों की जान जोखिम में
बलौदाबाजार: बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’, बलौदाबाजार-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित खोरसी नाला का पुराना पुल इन दिनों मौत को दावत दे रहा है। हाल ही में हुई तेज बारिश के बाद पुल के एक हिस्से की सड़क लगभग 5 फीट तक धंस गई है, जिससे वहां एक जानलेवा गड्ढा बन गया है, जो किसी भी समय एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बावजूद, जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है।
सैकड़ों लोगों की जान से हो रहा खिलवाड़
भले ही रायपुर-बलौदाबाजार के बीच एक नया बड़ा पुल बन गया हो, जिससे अधिकतर भारी वाहनों का आवागमन होता है, लेकिन यह पुराना पुल आज भी दर्जनों गांवों के लिए लाइफलाइन है। मगरचबा, खैरघाटा और आसपास के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण, किसान और स्कूली बच्चे रोजाना इसी पुल से होकर शहर आते-जाते हैं। इसके अलावा, पुल के पास ही एक प्राचीन साईं मंदिर है, जहां श्रद्धालु भी इसी रास्ते से पहुंचते हैं। लेकिन अब यह पुल सुविधा के बजाय एक बड़े खतरे का सबब बन चुका है।बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’
रात के अंधेरे में ‘अदृश्य जाल’ बन जाता है गड्ढा
इस गहरे गड्ढे की सबसे खतरनाक बात यह है कि बारिश के कारण इसमें पानी भर जाता है, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है। रात के अंधेरे में जब रोशनी कम होती है, तो यह गड्ढा एक ‘अदृश्य जाल’ की तरह बन जाता है। वाहन चालकों, विशेषकर बाइक सवारों और ऑटो चालकों को इसका पता ही नहीं चलता और वे सीधे हादसे का शिकार हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से गुजरने वाली स्कूली बसों के लिए भी यह गड्ढा एक गंभीर खतरा है।बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’
लापरवाही की हद, प्रशासन बना मूकदर्शक
सबसे चिंताजनक और हैरान करने वाली बात यह है कि इस जानलेवा गड्ढे को बने कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली है। मौके पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है, न ही किसी तरह की बैरिकेडिंग की गई है ताकि लोगों को खतरे से आगाह किया जा सके। प्रशासन की यह चुप्पी और घोर लापरवाही किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी की जान जाने के बाद ही अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे।बलौदाबाजार में हादसों को खुला न्योता: खोरसी नाला के पुराने पुल पर ‘मौत का गड्ढा’









