Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म! हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब इन युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी

Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म! हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब इन युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी. सरकारी नौकरी की आस में बैठे युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में ग्रुप डी की भर्ती को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार उम्मीदवारों के हक में खत्म हुई है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेलवे की याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि चयन पैनल में शामिल योग्य उम्मीदवारों को नौकरी पाने का पूरा अधिकार है। कोर्ट के इस फैसले से 100 से ज्यादा परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
क्या था पूरा मामला? 2010 से चल रही थी जंग
यह मामला आज का नहीं, बल्कि 14 साल पुराना है। रेलवे भर्ती बोर्ड, बिलासपुर ने 15 दिसंबर 2010 को ग्रुप डी (Group D) पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। प्रक्रिया पूरी हुई, लिस्ट बनी, लेकिन कई उम्मीदवार ऐसे थे जो योग्य होने के बावजूद नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) का इंतजार ही करते रह गए। जब रेलवे ने सुध नहीं ली, तो उम्मीदवारों ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का दरवाजा खटखटाया। मार्च 2024 में CAT ने उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन रेलवे इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट चला गया था।Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म!
रेलवे की दलील खारिज: ‘सिर्फ लिस्ट में नाम होना काफी नहीं’
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे ने तर्क दिया कि किसी उम्मीदवार का नाम चयन सूची (Selection Panel) में होने का मतलब यह नहीं है कि उसे नौकरी का कानूनी अधिकार मिल गया है। लेकिन, जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने रेलवे की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म!
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि चयन पैनल में शामिल उम्मीदवारों के मामले पर निष्पक्षता से विचार होना चाहिए। नियुक्ति करने वाला अधिकारी अपनी मनमर्जी से पैनल को नजरअंदाज नहीं कर सकता। अगर पद खाली हैं और उम्मीदवार योग्य हैं, तो उन्हें रिप्लेसमेंट कोटे के तहत मौका मिलना ही चाहिए।Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म!
4 महीने का अल्टीमेटम: खाली पदों का होगा ऑडिट
हाई कोर्ट ने न केवल फैसला सुनाया बल्कि रेलवे को सख्त निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि:
एक वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में 2010 की भर्ती के खाली पदों का ऑडिट (जांच) किया जाए।
यह देखा जाए कि नोटिफिकेशन के मुताबिक कितने पद भरे जाने थे और कितने अब भी खाली हैं।
रिप्लेसमेंट या वेटिंग लिस्ट से कितने लोगों को नौकरी दी जा सकती है, इसका हिसाब लगाया जाए।
कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए रेलवे को 4 महीने का समय दिया है। इसका मतलब है कि सालों से इंतजार कर रहे इन युवाओं को जल्द ही नियुक्ति मिल सकती है।Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म!
उम्मीदवारों के लिए बड़ी जीत
यह फैसला उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक नजीर है जो चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी सिस्टम की लेटलतीफी का शिकार हो जाते हैं। हाई कोर्ट के इस आदेश से यह साफ हो गया है कि अगर वैकेंसी मौजूद है, तो विभाग योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार नहीं कर सकता।Railway Group D: 14 साल का वनवास खत्म!



















