
Raipur Crime News: रायपुर में भरोसे का कत्ल! इलेक्ट्रॉनिक फर्म के एकाउंटेंट ने मालिक को लगाया ₹6 लाख का चूना, ऐसे खुला राज, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक नामी इलेक्ट्रॉनिक फर्म के एकाउंटेंट ने अपने ही मालिक के भरोसे को तार-तार कर दिया। एकाउंटेंट ने शातिराना तरीके से कंपनी के बैंक खाते से लाखों रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
1. एमजी रोड स्थित ‘अंबिका इलेक्ट्रॉनिक्स’ में बड़ी सेंधमारी
Raipur Crime News:मामला रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र का है। एमजी रोड स्थित अंबिका टावर में ‘अंबिका इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक बड़ी फर्म संचालित है। फर्म के संचालक 60 वर्षीय प्रवीण अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके यहाँ काम करने वाले एकाउंटेंट देवाशीष मेहर ने कंपनी के साथ गबन किया है।
2. किस्तों में पार किए ₹5.63 लाख: शातिर दिमाग का खेल
Raipur Crime News:पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी देवाशीष मेहर फर्म के खातों की जिम्मेदारी संभालता था। उसने 4 जुलाई 2024 से लेकर 1 सितंबर 2025 के बीच (दस्तावेजों के अनुसार) अलग-अलग तारीखों में कंपनी के बैंक अकाउंट में सेंध लगाई। आरोपी ने बड़ी ही चालाकी से छोटी-छोटी रकम कर कुल 5,63,390 रुपये अपने खुद के खाते में ट्रांसफर कर लिए। जब ऑडिट और हिसाब-किताब में विसंगति पाई गई, तब इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
3. मौदहापारा पुलिस ने दर्ज की FIR
Raipur Crime News:संचालक प्रवीण अग्रवाल की रिपोर्ट पर मौदहापारा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी देवाशीष मेहर के खिलाफ धारा 316(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपी के बैंक स्टेटमेंट खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने गबन की गई राशि कहाँ खर्च की है।
4. साइबर और वित्तीय अपराधों पर रायपुर पुलिस का सख्त रुख
Raipur Crime News:रायपुर पुलिस इन दिनों धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। एसएसपी रायपुर के निर्देश पर शहर में वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पुलिस न केवल आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है, बल्कि पीड़ितों की संपत्ति वापस दिलाने के लिए उनकी संपत्ति कुर्क करने जैसी सख्त कार्रवाई भी कर रही है।
5. व्यापारियों के लिए चेतावनी
Raipur Crime News:इस घटना ने व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी फर्म के मालिक को अपने बैंकिंग ट्रांजैक्शन का समय-समय पर खुद निरीक्षण करना चाहिए और ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ जैसे सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करना चाहिए।



















