Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ, ड्रोन सर्वे पूरा; जानिए किन 17 जिलों की बुझेगी प्यास
Ramjal Setu Link Project: 6492 करोड़ की लागत से बनेगी नहर, अलवर समेत कई जिलों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी शुरू, जल्द जारी होगा डेटा।

अलवर/जयपुर: Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ, ड्रोन सर्वे पूरा; जानिए किन 17 जिलों की बुझेगी प्यास. राजस्थान के पूर्वी हिस्से में पानी की समस्या को दूर करने वाली महत्वाकांक्षी ‘रामजल सेतु लिंक परियोजना’ (RSLP) ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। परियोजना के तहत प्रस्तावित 175 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण के लिए ड्रोन सर्वे का काम पूरा हो चुका है। सर्वे टीम ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर नहर के रास्ते में आने वाले पहाड़ों, नदियों, तालाबों और आबादी क्षेत्र का एक हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल मैप तैयार कर लिया है।
Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. इस सर्वे के पूरा होने के साथ ही अब नहर निर्माण की दिशा में जमीन अलॉटमेंट और अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है।
हाई-टेक सर्वे से तय हुआ नहर का रूट

Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. ड्रोन सर्वे से मिले डेटा के आधार पर अलवर जिला प्रशासन अब जमीन अलॉटमेंट को अंतिम रूप देने जा रहा है। इस डिजिटल मैप से यह साफ हो गया है कि नहर किन हिस्सों से गुजरेगी और कहां तकनीकी चुनौतियां (जैसे पहाड़ या आबादी) आ सकती हैं। प्रशासन अब यह तय करेगा कि किन स्थानों पर संरचनात्मक बदलाव की जरूरत है ताकि पानी का बहाव निर्बाध रहे।
वन विभाग और किसानों की जमीन का अधिग्रहण
Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. नहर निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन ने रोडमैप तैयार कर लिया है:
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वन विभाग की जमीन: नहर के रास्ते में जहां वन विभाग की जमीन आ रही है, वहां कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन वन विभाग को बदले में वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराएगा।
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किसानों की जमीन: पटवारियों ने प्रभावित इलाकों की रिपोर्ट सौंप दी है। जल्द ही यह डेटा जारी होगा कि कितने किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी और उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा।
6492 करोड़ की लागत, 4.5 साल में पूरा होगा काम
इस विशाल परियोजना पर कुल 6492 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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फेज-1: पहले चरण में 3446 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें अलवर को केवल पीने का पानी मिलेगा।
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फेज-2: दूसरे चरण में किसानों को सिंचाई के लिए नहर का पानी मिलने की उम्मीद है।
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समय सीमा: कार्यदायी एजेंसी को निर्माण कार्य साढ़े 4 साल में पूरा करना होगा। साथ ही, एजेंसी पर अगले 20 साल तक नहर के मेंटिनेंस (रखरखाव) की जिम्मेदारी भी होगी।
कहां से आएगा पानी और कैसा होगा रूट?
Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. अलवर जिले को इस परियोजना के जरिए 200 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा। पानी करौली जिले के खुर्रा-चैनपुरा से लिफ्ट होकर 150 किलोमीटर का सफर तय कर अलवर पहुंचेगा।
पानी का सफर ऐसे होगा:
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करौली के खुर्रा-चैनपुरा से पानी अलवर की राजगढ़ तहसील में प्रवेश करेगा।
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सबसे पहले पानी राजगढ़ के धमरेड़ बांध में आएगा।
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इसके बाद पानी को नटनी के बारां तक पहुंचाया जाएगा।
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यहां से पानी दो भागों में बंटेगा:
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एक लिंक नहर जयसमंद बांध जाएगी।
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दूसरी लिंक नहर रूपारेल नदी के जरिए घाट बांध तक जाएगी।
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जयसमंद बांध से फिर दो नहरें निकलेंगी, जो सिलीसेढ़ झील और एक अन्य कृत्रिम बांध को भरेंगी।
इन 17 जिलों की बदलेगी तस्वीर
Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. रामजल सेतु लिंक परियोजना (पूर्व में ERCP) से राजस्थान के 17 जिलों को फायदा होगा। इससे न केवल पेयजल संकट दूर होगा, बल्कि भविष्य में सिंचाई की सुविधा भी मिलेगी। लाभान्वित जिले हैं:
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अलवर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, भरतपुर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, टोंक, अजमेर, ब्यावर, कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़।
क्या है नाम बदलने की कहानी?
Rajasthan News: राजस्थान में 175KM लंबी नहर का रास्ता साफ. इस परियोजना को पहले पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के नाम से जाना जाता था। जनवरी 2024 में इसका नाम बदलकर ‘पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (PKC-ERCP) किया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इसे नया नाम ‘रामजल सेतु परियोजना’ (RSLP) दिया गया है।









