राजिम कुंभ 2026: 6 करोड़ के टेंडर पर ‘महाभारत’, मात्र 3 दिन की मोहलत पर उठे गंभीर सवाल, क्या ‘फिक्स’ है पूरा खेल?

राजिम कुंभ 2026: छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में आयोजित होने वाले भव्य ‘राजिम कुंभ कल्प-मेला 2026’ की तैयारियां शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई हैं। करीब 6 करोड़ रुपए के इवेंट मैनेजमेंट टेंडर को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। विवाद की मुख्य वजह टेंडर प्रक्रिया की वह ‘सुपरफास्ट’ समय-सीमा है, जिसे लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मात्र 72 घंटे में टेंडर फाइनल? प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
राजिम कुंभ 2026: गरियाबंद जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए इस टेंडर में प्री-बिड मीटिंग से लेकर टेंडर खोलने तक की पूरी प्रक्रिया को महज 3 दिनों के भीतर निपटाने का प्रावधान रखा गया है। सोशल मीडिया पर टेंडर की कॉपी वायरल होने के बाद लोग इसे “पसंदीदा फर्म को काम देने की जुगत” बता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इतने कम समय में किसी नई एजेंसी के लिए पीपीटी प्रेजेंटेशन और फिजिकल सबमिशन की तैयारी करना लगभग असंभव है।
करोड़ों का बजट: कहाँ और कितना होगा खर्च?
राजिम कुंभ 2026: राजिम कुंभ 1 फरवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसके भव्य आयोजन के लिए बजट को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:
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3.80 करोड़ रुपए: नया मेला ग्राउंड और राजीव लोचन मंदिर क्षेत्र के विकास और इवेंट के लिए।
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2.25 करोड़ रुपए: संत समागम स्थल और कुलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की व्यवस्थाओं के लिए।
विपक्ष का हमला: “नियमों की बलि चढ़ाकर हो रही बंदरबांट”
राजिम कुंभ 2026: कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को महज एक ‘औपचारिकता’ करार दिया है। गरियाबंद कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा का कहना है कि देशभर में ऑनलाइन टेंडर के लिए सामान्यतः 21 दिनों का समय दिया जाता है, ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो सके। लेकिन यहाँ महज 3 दिन का समय देना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर किसी विशेष एजेंसी को फायदा पहुँचाने की कोशिश हो रही है।
मंत्री का आश्वासन: “नहीं होने देंगे भ्रष्टाचार”
राजिम कुंभ 2026: टेंडर प्रक्रिया पर बढ़ते विवाद के बीच संबंधित विभाग के मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि कुंभ के आयोजन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सुशासन के सिद्धांतों के तहत होगी, हालांकि 3 दिन की समय-सीमा पर उठ रहे सवालों ने प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है।
टेंडर की विवादित ‘टाइमलाइन’ पर एक नज़र:
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8 जनवरी: प्री-बिड बैठक।
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9 जनवरी: बिड (बोली) जमा करने की अंतिम तारीख।
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10 जनवरी: पीपीटी प्रेजेंटेशन, फिजिकल सबमिशन और टेंडर ओपनिंग।
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नतीजा: सिर्फ 3 दिनों में 6 करोड़ के काम का फैसला।
क्यों उठ रहे हैं सवाल? (Key Issues)
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प्रतिस्पर्धा की कमी: कम समय होने से बड़ी और अनुभवी एजेंसियां हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
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नियमों की अनदेखी: सामान्य टेंडर प्रक्रिया के लिए तय 21 दिनों के मानक का पालन नहीं।
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सेटिंग का आरोप: सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे ‘प्री-प्लान्ड’ टेंडर बता रहे हैं।









