गणतंत्र दिवस परेड 2026: झांकियों का गौरवशाली इतिहास और इस बार की खास थीम ‘वंदे मातरम’

Republic Day Tableaux History & Updates: गणतंत्र दिवस परेड 2026: झांकियों का गौरवशाली इतिहास और इस बार की खास थीम ‘वंदे मातरम’, हर साल 26 जनवरी की सुबह जब ‘कर्तव्य पथ’ पर गणतंत्र दिवस की परेड शुरू होती है, तो पूरी दुनिया की नजरें भारत की सांस्कृतिक झलक और सैन्य शक्ति पर टिकी होती हैं। इस परेड का सबसे आकर्षक हिस्सा होती हैं—विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की रंग-बिरंगी ‘झांकियां’। वर्ष 2026 में देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, जिसमें एक बार फिर भारत की बदलती तस्वीर और आत्मनिर्भरता की कहानी दिखेगी।
झांकियों का सफर: 1952 से अब तक का बदलाव
गणतंत्र दिवस परेड 2026: यद्यपि गणतंत्र दिवस की परेड 1950 में शुरू हुई थी, लेकिन झांकियों को औपचारिक रूप से इसमें 1952 में शामिल किया गया। शुरुआत में ये झांकियां बहुत साधारण होती थीं, जो अक्सर पौराणिक कथाओं या लोक संस्कृति पर आधारित होती थीं। मशहूर कमेंटेटर जसदेव सिंह की आवाज ने दशकों तक इन झांकियों का सजीव वर्णन देश के कोने-कोने तक पहुँचाया। आज ये झांकियां साधारण कलाकृतियों से बदलकर हाई-टेक प्रदर्शनियों का रूप ले चुकी हैं।
गणतंत्र दिवस 2026 की थीम: स्वतंत्रता और समृद्धि का संगम
गणतंत्र दिवस परेड 2026: इस वर्ष की परेड बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस बार की थीम “स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र- आत्मनिर्भर भारत” रखी गई है।
150 वर्ष पूरे: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में यह थीम चुनी गई है।
ईको-फ्रेंडली पहल: इस बार की झांकियों में प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह वर्जित होगा।
नामकरण नियम: झांकी के अगले हिस्से पर नाम हिंदी में और पिछले हिस्से पर अंग्रेजी में लिखा जाएगा।
‘विविधता में एकता’ से ‘तकनीकी महाशक्ति’ तक
गणतंत्र दिवस परेड 2026: पहले झांकियां केवल सांस्कृतिक विरासत और खेती-किसानी को दर्शाती थीं, लेकिन 1990 के दशक के बाद इसमें बड़ा बदलाव आया। अब डीआरडीओ (DRDO) और अंतरिक्ष विभाग की झांकियां भारत की रक्षा शक्ति, मिसाइल तकनीक और स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन करती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि 1950 का साधारण भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और स्पेस पावर बन चुका है।
रोटेशन सिस्टम: क्यों इस बार दिल्ली की झांकी नहीं दिखेगी?
गणतंत्र दिवस परेड 2026: सरकार ने 2024 से एक नया रोटेशन सिस्टम लागू किया है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को तीन साल के भीतर कम से कम एक बार अपनी झांकी प्रदर्शित करने का अवसर मिले। इसी नियम के कारण इस वर्ष दिल्ली सहित 11 राज्यों की झांकियां परेड का हिस्सा नहीं होंगी। 2026 की परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी, जिनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 विभिन्न मंत्रालयों की होंगी।
दिल्ली की झांकियों का यादगार इतिहास
गणतंत्र दिवस परेड 2026: भले ही इस बार दिल्ली की झांकी न हो, लेकिन इसका इतिहास बहुत समृद्ध रहा है।
1965: हरित क्रांति और पूसा संस्थान के योगदान को दिखाया गया।
1993: दिल्ली की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का प्रदर्शन हुआ।
2000: कारगिल युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि दी गई।
अन्य खास झलकियां: मिर्जा गालिब, अमीर खुसरो, दिल्ली मेट्रो और महात्मा गांधी के दिल्ली प्रवास पर आधारित झांकियों ने हमेशा दर्शकों का दिल जीता है।
परेड के बाद भी जारी रहता है झांकियों का महत्व
गणतंत्र दिवस परेड 2026: 26 जनवरी की परेड खत्म होने के बाद इन झांकियों का काम समाप्त नहीं होता। इन्हें सार्वजनिक स्थलों, संग्रहालयों और स्कूलों में प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। ये झांकियां आने वाली पीढ़ियों को भारत की विरासत, जैव-विविधता और सामाजिक विकास के बारे में जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम बनती हैं।



















