
रायपुर: डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे रिटायर्ड डॉक्टर, 15 दिनों तक डराकर ठग लिए ₹1.28 करोड़, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ आमासिवनी इलाके में रहने वाले एक 74 वर्षीय रिटायर्ड पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) को साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर करीब 1.28 करोड़ रुपए की चपत लगा दी। जालसाजों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को इतना डराया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी उनके हवाले कर दी।
कैसे शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का यह खतरनाक खेल?
डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे रिटायर्ड डॉक्टर,ठगी का यह सिलसिला 31 दिसंबर को शुरू हुआ, जब डॉ. स्वपन कुमार सेन के पास एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप (WhatsApp) कॉल आया। कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था, जिसने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। जालसाज ने डॉक्टर को झांसा दिया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए करोड़ों रुपए का अवैध लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) हुआ है।
फर्जी FIR की कॉपी दिखाकर पैदा किया खौफ
डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे रिटायर्ड डॉक्टर,बुजुर्ग डॉक्टर को डराने के लिए ठगों ने उनके व्हाट्सएप पर एक फर्जी एफआईआर (FIR) की कॉपी भेजी। वर्दीधारी व्यक्ति को देखकर डॉक्टर बुरी तरह घबरा गए। अपराधियों ने उन्हें धमकाया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया, तो मुंबई पुलिस की टीम उन्हें गिरफ्तार करने रायपुर पहुंच जाएगी। इसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान अपराधियों ने डॉक्टर से उनके बैंक खातों, एफडी (FD) और अन्य वित्तीय संपत्तियों की पूरी जानकारी हासिल कर ली।
किस्तों में ऐंठे ₹1.28 करोड़: तोड़ी जीवनभर की जमा पूंजी
डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे रिटायर्ड डॉक्टर,जालसाजों ने जांच का बहाना बनाकर डॉक्टर को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। अपराधियों के डर से डॉक्टर ने तीन अलग-अलग किस्तों में पैसे भेजे:
पहली किस्त: 34 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए।
दूसरी किस्त: 10 दिन बाद डरा-धमकाकर 39 लाख रुपए लिए गए।
तीसरी किस्त: डॉक्टर ने अपनी बैंक एफडी तुड़वाकर 55 लाख रुपए ठगों के खातों में डाल दिए।
जब ठगों ने और पैसों की मांग की, तब डॉक्टर को एहसास हुआ कि वे किसी बड़े जाल में फंस चुके हैं।
रेंज साइबर पुलिस की कार्रवाई: ₹60 लाख होल्ड पर
डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे रिटायर्ड डॉक्टर,ठगी का शिकार होने के बाद डॉक्टर ने 16 जनवरी को विधानसभा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला गंभीर देखते हुए रेंज साइबर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन बैंक खातों को ट्रेस किया जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए थे। फिलहाल, पुलिस ने ठगी गई रकम में से करीब 60 लाख रुपए होल्ड कराने में सफलता हासिल की है। अपराधियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय हैं।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें? (Cyber Security Tips)
कानूनी प्रक्रिया को समझें: भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।
अनजान कॉल से सावधान: यदि कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराए, तो घबराएं नहीं। तुरंत नजदीकी थाने में जाकर इसकी जानकारी दें।
निजी जानकारी साझा न करें: कभी भी व्हाट्सएप या फोन पर अपने बैंक अकाउंट, ओटीपी (OTP), आधार या वित्तीय जानकारी किसी को न दें।
हेल्पलाइन नंबर: यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें



















