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Rohtasgarh Ropeway Collapse: रोहतासगढ़ किला रोपवे हादसा: उद्घाटन से पहले ही धड़ाम हुआ 13 करोड़ का प्रोजेक्ट, ट्रायल के दौरान गिरा मुख्य टावर

Rohtasgarh Ropeway Collapse: रोहतासगढ़ किला रोपवे हादसा: उद्घाटन से पहले ही धड़ाम हुआ 13 करोड़ का प्रोजेक्ट, ट्रायल के दौरान गिरा मुख्य टावर. बिहार के रोहतास जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से तैयार किया गया ‘रोहतासगढ़ किला रोपवे’ ट्रायल के दौरान ही जमींदोज हो गया। महज 7 दिनों से चल रहे परीक्षण के बीच शुक्रवार को इसका मुख्य टावर भरभरा कर गिर पड़ा। इस घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासनिक जल्दबाजी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उद्घाटन की तैयारी और करोड़ों का नुकसान

Rohtasgarh Ropeway Collapse: कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम की यात्रा को सुगम बनाने के लिए इस रोपवे का निर्माण 13 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। नए साल में इसका भव्य उद्घाटन होना था, लेकिन ट्रायल के दौरान ही पिलर धंसने से पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन अपर टर्मिनल स्टेशन को काफी नुकसान पहुँचा है।

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1400 फीट की ऊंचाई और तकनीकी चुनौतियां

Rohtasgarh Ropeway Collapse: यह रोपवे करीब 1324 मीटर लंबा है, जिसमें कुल 5 टावर लगाए गए हैं। पहाड़ी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कुछ टावरों पर 40 डिग्री तक की तीव्र चढ़ाई दी गई है।

  • शुरुआत: इसका निर्माण कार्य साल 2020 में शुरू हुआ था।

  • लक्ष्य: इसे 2023 में ही पूरा होना था, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण इसमें देरी हुई।

  • फायदा: इसके शुरू होने से श्रद्धालुओं को 1400 फीट ऊंची खड़ी चढ़ाई पैदल नहीं चढ़नी पड़ती।

क्या प्रशासनिक दबाव बना हादसे की वजह?

Rohtasgarh Ropeway Collapse: सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए प्रशासन की ओर से काम जल्द पूरा करने का भारी दबाव था। इसी जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए ट्रायल शुरू कर दिया गया। शुक्रवार को जब रोपवे पर वजन लादकर परीक्षण किया जा रहा था, तभी मुख्य टावर भार सहन नहीं कर पाया और धंस गया।

उच्चस्तरीय जांच के आदेश, 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

Rohtasgarh Ropeway Collapse: रोपवे गिरने की घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और तकनीकी खामियों की गहन जांच की जाएगी। जांच टीम को 24 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

पर्यटकों का सपना अब अधर में

Rohtasgarh Ropeway Collapse: रोहतासगढ़ किला बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। रोपवे के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता, बल्कि स्थानीय बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए किले तक पहुँचना आसान हो जाता। अब टावर गिरने के बाद इस प्रोजेक्ट के दोबारा शुरू होने में लंबा समय लग सकता है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों में निराशा है।

Dr. Tarachand Chandrakar

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