रुपया हुआ तार-तार! 94.24 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंची भारतीय करेंसी, जानें क्यों बेअसर हो रहे हैं राहत के संकेत

रुपया हुआ तार-तार!भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। वैश्विक अस्थिरता और घरेलू बाजार से विदेशी निवेशकों केपलायन के बीच भारतीय रुपया (INR) अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (Record Low) पर बंद हुआ है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे टूटकर 94.24 के स्तर पर जा गिरा, जो इतिहास में पहली बार देखा गया है।
लगातार तीसरे दिन गिरावट का सिलसिला
रुपया हुआ तार-तार!रुपये में गिरावट का यह दौर पिछले तीन कारोबारी सत्रों से थमता नजर नहीं आ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
मंगलवार: 93.76 प्रति डॉलर
बुधवार: 94.05 प्रति डॉलर
शुक्रवार: 94.24 प्रति डॉलर (रिकॉर्ड लो)
रुपया हुआ तार-तार!महज तीन दिनों के भीतर भारतीय मुद्रा ने अपनी वैल्यू में 48 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की है, जिसने बाजार विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है।
आखिर क्यों गिर रहा है रुपया? ये हैं 3 मुख्य कारण
आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर इंडेक्स का नरम होना रुपये के लिए अच्छा माना जाता है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल
105.75** पर आ गया था और डॉलर भी कुछ हद तक शांत था, फिर भी रुपया नहीं संभल सका। इसके पीछे ये कारण जिम्मेदार हैं:
FII की भारी बिकवाली: इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालना है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक इस महीने अब तक 93,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बेचकर बाहर निकल चुके हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर मोड़ दिया है, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव बढ़ा है।
निवेशकों का घटता रिटर्न: जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों का डॉलर में मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। इससे बचने के लिए वे और ज्यादा बिकवाली करते हैं, जिससे रुपया और ज्यादा गिरता है—यह एक खतरनाक चक्र बन गया है।
RBI के सामने ‘अग्निपरीक्षा’: क्या 94 का स्तर बचेगा?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए मौजूदा स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस वित्त वर्ष में 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर को बचाने की पूरी कोशिश करेगा। बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये को 93.30 से 92.80 के स्तर तक वापस लाने का प्रयास किया जा सकता है।
रुपया हुआ तार-तार!हालांकि, इसमें एक जोखिम भी है। रुपये को सहारा देने के लिए जब RBI अपने डॉलर भंडार का उपयोग करता है, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) घटता है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसी रफ्तार से जारी रही, तो रुपये को रिकॉर्ड लो से उबारना प्रशासन के लिए काफी मुश्किल हो सकता है।



















