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Schizophrenia छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी, राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले फैसले में, कोटा की एक युवती द्वारा अपनी मानसिक बीमारी ‘स्किजोफ्रेनिया’ को छुपाकर की गई शादी को शून्य (Void) घोषित कर दिया है। जस्टिस इंदरजीत सिंह और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने इसे ‘कानूनी धोखाधड़ी’ करार देते हुए न केवल विवाह को अमान्य ठहराया, बल्कि पति को पत्नी द्वारा लगाए गए दहेज प्रताड़ना सहित सभी आपराधिक मामलों और आर्थिक जिम्मेदारियों से भी मुक्त कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

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यह मामला चित्तौड़गढ़ निवासी एक व्यक्ति और कोटा की एक युवती से जुड़ा है, जिनका विवाह 29 अप्रैल, 2013 को हुआ था। पति के अनुसार, शादी के कुछ ही समय बाद पत्नी का व्यवहार असामान्य हो गया। वह अजीब हरकतें करने लगी और उसके हाथ लगातार हिलते रहते थे। शक होने पर पति को पत्नी के सामान से एक डॉक्टर की पर्ची मिली, जिससे खुलासा हुआ कि वह शादी से पहले से ही स्किजोफ्रेनिया नामक गंभीर मानसिक बीमारी का इलाज करा रही थी।छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

यह जानकारी सामने आने के बाद, पति ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12 के तहत विवाह को शून्य घोषित करने के लिए कोटा की पारिवारिक अदालत में याचिका दायर की। हालांकि, 28 अगस्त, 2019 को पारिवारिक अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद पति ने इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी।छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

पत्नी ने लगाए थे दहेज प्रताड़ना के आरोप

इस बीच, महिला ने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए एक आपराधिक मामला दर्ज करा दिया था। महिला ने अदालत में दलील दी कि उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, बल्कि शादी से पहले हुई एक पारिवारिक दुर्घटना के कारण उसे केवल अस्थायी अवसाद (डिप्रेशन) हुआ था।छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

हाईकोर्ट ने क्यों माना ‘कानूनी धोखाधड़ी’?

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों, मेडिकल रिकॉर्ड्स और गवाहों के बयानों का गहनता से अवलोकन किया। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि:

  1. महिला विवाह से पहले से ही स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित थी और नियमित रूप से दवा ले रही थी।

  2. यह एक “गंभीर मानसिक विकार” है, जो एक स्वस्थ वैवाहिक जीवन जीने की क्षमता को गहराई से प्रभावित करता है।

  3. इस महत्वपूर्ण तथ्य को विवाह के समय जानबूझकर छुपाया गया, जो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत ‘कानूनी धोखाधड़ी’ की श्रेणी में आता है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए, अदालत ने माना कि एक साथी का मानसिक स्वास्थ्य वैवाहिक अधिकारों का एक अभिन्न अंग है और इसे छुपाना दूसरे पक्ष के साथ धोखा है।छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

अंतिम फैसला: विवाह शून्य और पति सभी आरोपों से मुक्त

31 जुलाई को दिए अपने अंतिम फैसले में, हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के फैसले को पलटते हुए विवाह को शुरुआत से ही अमान्य (Null and Void) घोषित कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने पति को पत्नी द्वारा लगाए गए दहेज उत्पीड़न के मामले और भविष्य के किसी भी गुजारा भत्ता जैसी आर्थिक जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया। यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल कायम करता है, जहां विवाह के लिए जरूरी मौलिक तथ्यों को धोखे से छुपाया जाता है।छुपाकर की शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाह को किया शून्य; पति को दहेज केस से भी किया बरी

Pooja Chandrakar

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