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SECL कुसमुंडा खदान: अनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक

कोरबा की मेगा प्रोजेक्ट खदान में करोड़ों की सुरक्षा एजेंसी के बावजूद अनधिकृत लोडरों से ट्रकों में कोयला लोडिंग जारी, प्रशासन और प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा। SECL कुसमुंडा खदान: अनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक, छत्तीसगढ़ के कुसमुंडा खदान से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां आज भी अनाधिकृत लोडरों का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। खदान में तैनात करोड़ों की सुरक्षा एजेंसी त्रिपुरा राइफल्स और SECL के जिम्मेदार अधिकारियों के कथित संरक्षण की वजह से, अनाधिकृत लोडरों को रोकने में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस वजह से खदान में कोयला चोरी का सिलसिला लगातार जारी है।

खदान में कोयला चोरी का खुलासा

कुसमुंडा खदान, जो 55 मिलियन टन उत्पादन की क्षमता वाली मेगा प्रोजेक्ट खदान है, कोरबा जिले में कोयला उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इसके बावजूद, सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद खदान में कोयला चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैंअनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक

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पिछले महीने ही SECL के कुछ कर्मचारियों ने चार ट्रकों में लाखों रुपये का अतिरिक्त कोयला पाया और मामले की सूचना कुसमुंडा पुलिस को दी। इसके बावजूद आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।अनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक

अनाधिकृत लोडरों का प्रवेश और सुरक्षा एजेंसी की चुप्पी

सूत्रों के अनुसार, खदान में आधा दर्जन से अधिक अनाधिकृत पे-लोडर प्रवेश पा चुके हैं। इन लोडरों का उपयोग कोयला चोरी में किया जा रहा है। चोरी के दौरान ट्रकों को लोडिंग पॉइंट पर वापस लाकर दोबारा कोयला डाला जाता है।अनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक

  • कुसमुंडा खदान में मोटरसाइकिल का प्रवेश भी नियंत्रित है, फिर लोडर कैसे अंदर आया?

  • सुरक्षा एजेंसी और SECL प्रबंधन के बीच कथित सांठगांठ ने चोरी की घटनाओं को बढ़ावा दिया है।

  • सूत्रों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि ये लोडर किसके हैं और किस इशारे पर काम कर रहे हैं।प्रशासविशेषज्ञ और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि SECL कुसमुंडा प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसी दोनों ने आंखें मूंद ली हैं, जिसके कारण कोयला चोरी हो रही है।

विशेष रूप से प्रशासन से मांग की जा रही है कि:

  1. खदान में चल रहे अनाधिकृत लोडरों की पूरी जांच की जाए।

  2. भ्रष्ट्र अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

  3. जांच में पुष्टि होते ही खदान से इन लोडरों को तुरंत बाहर किया जाए।

कुसमुंडा खदान की सुरक्षा और कोयला उत्पादन की प्रतिष्ठा पर यह घटनाएं गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और खदान में कोयला चोरी की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाता है।अनाधिकृत लोडरों की खुली धड़ल्ले से कोयला चोरी, सुरक्षा एजेंसी बनी मूकदर्शक

Pooja Chandrakar

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