Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार! ट्रंप की धमकी और फेड का डर, निवेशकों के डूबे करोड़ों

Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार! ट्रंप की धमकी और फेड का डर, निवेशकों के डूबे करोड़ों. भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में आज, यानी मंगलवार को एक बार फिर भारी उथल-पुथल मची हुई है। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर ‘बियर्स’ (मंदी लाने वाले) हावी नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 360 अंकों की गिरावट के साथ 84,742.87 के स्तर पर खुला, लेकिन बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि यह शुरुआती कारोबार में ही 622 अंक टूटकर 84,485 पर आ गया।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी ने भी निराश किया और 208 अंकों की गिरावट के साथ 25,752 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सोमवार को भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, और आज का दिन निवेशकों के लिए और भी भारी साबित हो रहा है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
बाज़ार में चौतरफा बिकवाली: कोई सेक्टर नहीं बचा

आज बाजार की हालत यह है कि हरियाली ढूंढना मुश्किल हो गया है। निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान (Red Zone) में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा पिटाई मीडिया और आईटी सेक्टर की हुई है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
निफ्टी मीडिया: 1.79% की भारी गिरावट।
निफ्टी आईटी: 1.40% टूटा।
निफ्टी मेटल और ऑटो: क्रमश: 1.27% और 1.20% की कमजोरी।
इसके अलावा फार्मा, पीएसयू बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी 0.50% से लेकर 1% तक की गिरावट देखी जा रही है।
बाजार गिरने के 5 प्रमुख कारण (Why Share Market is Falling?)
शेयर बाजार में आई इस सुनामी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई ग्लोबल और डोमेस्टिक कारण जिम्मेदार हैं। आइए जानते हैं आखिर बाजार क्यों गिर रहा है:
1. डोनाल्ड ट्रंप का ‘टैरिफ वार’ (Donald Trump Tariff Threat)
बाजार को सबसे बड़ा झटका अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से लगा है। ट्रंप ने एक बार फिर ‘ट्रेड वॉर’ का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय चावल (Indian Rice) पर नया टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि भारत सस्ता चावल अमेरिका में डंप कर रहा है, जिससे वहां के किसान प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, मैक्सिको और कनाडा को दी गई धमकियों ने भी ग्लोबल निवेशकों का मूड खराब कर दिया है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
2. अमेरिकी फेड के फैसले से पहले घबराहट
दुनिया भर के निवेशकों की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) की बैठक पर टिकी हैं। बुधवार, 10 दिसंबर को फेड ब्याज दरों (Interest Rates) पर अपना फैसला सुनाने वाला है। बाज़ार को डर है कि अगर फेड ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की, तो डॉलर इंडेक्स और मजबूत होगा, जो भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक साबित होगा। इसी डर के चलते निवेशक पहले ही मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
3. जापान से खतरे की घंटी (Rising Bond Yields)
जापान की बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) का बढ़ना भी भारतीय बाजार के लिए शुभ संकेत नहीं है। जापानी बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इससे आशंका है कि जापान में ब्याज दरें बढ़ेंगी और येन (Yen) मजबूत होगा। इसका सीधा असर ‘येन कैरी ट्रेड’ (Yen Carry Trade) पर पड़ेगा, जिससे निवेशकों को अपनी उधारी वाली पोजीशन काटनी पड़ सकती है। यह भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा बाहर जाने का एक बड़ा कारण बन सकता है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
4. रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रुपये (Indian Rupee) की कमजोरी ने चिंता बढ़ा दी है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है और मंगलवार को यह 10 पैसे की कमजोरी के साथ 90.15 के स्तर पर आ गया। रुपये का गिरना विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को कम आकर्षक बनाता है और देश के इंपोर्ट बिल को महंगा करता है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
5. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। जुलाई महीने से शुरू हुआ बिकवाली का सिलसिला अभी तक नहीं थमा है। आंकड़ों के मुताबिक, कैश सेगमेंट में FIIs अब तक 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं। सिर्फ दिसंबर के शुरुआती 5 दिनों में ही उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है, जिससे बाजार संभल नहीं पा रहा है।Share Market Crash: धड़ाम हुआ शेयर बाजार!
फिलहाल बाजार का मूड और माहौल दोनों ही निगेटिव नजर आ रहे हैं। ग्लोबल संकेतों और ट्रंप की नीतियों को लेकर अनिश्चितता जब तक खत्म नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों की सलाह है कि खुदरा निवेशक इस समय सावधानी बरतें और किसी भी भारी निवेश से पहले मार्केट के स्थिर होने का इंतजार करें।



















