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मध्यप्रदेश

“आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान: ‘प्रकरण क्या… जिंदगी भी चली जाए तो कोई दिक्कत नहीं!'”

मध्य प्रदेश: “आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान: ‘प्रकरण क्या… जिंदगी भी चली जाए तो कोई दिक्कत नहीं!'” देवास-सीहोर के खिवनी अभयारण्य क्षेत्र में आदिवासियों के घरों को तोड़े जाने और दिवाली से ठीक पहले उन्हें जमीन खाली करने के नोटिस थमाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वे आदिवासी भाई-बहनों के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने देंगे।

“आदिवासी भाई-बहनों के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा”

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बुधनी के भैरूंदा में आदिवासियों को मिले नोटिस पर शिवराज सिंह चौहान ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें बुदनी से भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव ने बताया कि किसी ने चिट्ठी लिखकर यह कहा है कि “शिवराज सिंह आदिवासियों को भड़काते हैं, इस पर प्रकरण दर्ज करो।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज ने दृढता से कहा, “अरे प्रकरण क्या… जिंदगी भी चली जाए तो कोई दिक्कत नहीं। मैं आदिवासी भाई-बहनों के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा।”आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह ने जोर देकर कहा कि भाजपा की सरकार आदिवासी हितैषी है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी आदिवासियों के प्रति संवेदनशील हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे आदिवासियों की जमीनों के संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे और उन्हें इस पूरे विषय से अवगत करवाएंगे। बता दें कि दीपावली के दिन वन विभाग द्वारा आदिवासी परिवारों को जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिए गए थे, जिसके बाद सभी परिवार धरने पर बैठ गए थे।आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान

“कुछ लोगों की आंखों में शिवराज खटकता है”

एक युवक द्वारा यह कहे जाने पर कि “यहां पर आदिवासियों को शिवराज सिंह चौहान ने बसाया है,” पूर्व मुख्यमंत्री ने जवाब दिया, “ऐसे लोग जो मानसिक रूप से विकृत हैं, इतनी जनता उनको दिखाई नहीं देती। उनकी आंखों में तो शिवराज सिंह चौहान खटकता है।” उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो इस कार्रवाई के पीछे हैं, यह कहते हुए कि “जिनका राज यहां पर है उनको कह रहे हैं कि यह कहां से आ गए और उनको नोटिस दिए जा रहे हैं। यह जो कर रहे हैं वो विकृत मानसिकता के लोग हैं, यह पागलपन की बात है और इसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।”आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान

दिवाली से पहले थमाए गए नोटिस, छीनी रोजी-रोटी का साधन

शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर विशेष दुख व्यक्त किया कि जब लोग दिवाली के पर्व को मनाने की तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी दिन गरीब आदिवासी भाइयों और बहनों को नोटिस थमा दिए गए। उन्होंने आदिवासियों के लिए जमीन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “ज़मीन उनकी जिंदगी है। ज़मीन जिस पर वर्षों से कब्ज़ा है, वो उनकी रोज़ी-रोटी का साधन है। ज़मीन जो उनके बुढ़ापे का सहारा है, ज़मीन जो उनके बच्चों का आसरा है।”आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान

इस मामले में शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता और उनके तीखे बयानों ने आदिवासियों के मुद्दे को एक नई धार दी है। अब देखना होगा कि उनकी इस मुखरता का क्या प्रभाव पड़ता है और आदिवासी परिवारों को न्याय मिल पाता है या नहीं।आदिवासियों के हक की लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान

Dr. Tarachand Chandrakar

Editor-in-Chief

डॉ. ताराचंद चंद्राकर एक प्रखर विचारक और अनुभवी पत्रकार हैं, जो 'निडर छत्तीसगढ़' के माध्यम से निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। तथ्यों की शुद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में एक विश्वसनीय नाम बनाया है।

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