छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग समेत 58 हाईटेंशन कनेक्शनों में मिली भारी गड़बड़ी, सूडा (SUDA) ने दिए सुधार के निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में बिजली बिल प्रबंधन को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। राज्य के 22 शहरों में हुए एनर्जी ऑडिट (Energy Audit) ने वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन निकायों ने पिछले कुछ महीनों में अनुबंध (Contract) से ज्यादा बिजली खींची, जिसके चलते सरकारी खजाने को 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने इस फिजूलखर्ची को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई है और तुरंत सुधार के निर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
क्या है पूरा मामला? (The Whole Matter)
प्रदेश के नगरीय निकायों में बिजली बिलों की समीक्षा के लिए ‘एनर्जी बिल ऑडिट रिफॉर्म’ के तहत एक विशेष डेस्क ऑडिट कराया गया था। ऑडिट संस्था ने निकायों के 84 हाईटेंशन (HT) कनेक्शनों की जांच की। इसमें पाया गया कि 58 कनेक्शनों में भारी विसंगतियां हैं। छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई निकायों ने अनुबंध से अधिक बिजली (Overload) का उपयोग किया, जबकि कई जगह बिजली की मांग अनुबंध से काफी कम (Under-utilization) थी। इन दोनों ही स्थितियों में बिजली कंपनी (CSPDCL) के नियमों के तहत भारी जुर्माना वसूला जाता है। छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 से मई 2025 (आकलित अवधि) के बीच इन विसंगतियों के कारण लगभग 20.30 करोड़ रुपये की राशि का अतिरिक्त अपव्यय आंका गया है। छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
नियमों की अनदेखी से लगा करोड़ों का चुना
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत विनियामक आयोग के ‘इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड 2011’ के अनुसार बिजली के उपयोग पर पेनल्टी के सख्त नियम हैं, जिनका ध्यान निकायों ने नहीं रखा:
अनुबंध से ज्यादा उपयोग: यदि किसी माह में बिजली की मांग अनुबंध से 20% तक ज्यादा होती है, तो सामान्य टैरिफ का 1.5 गुना शुल्क लगता है। यदि यह 20% से भी अधिक हो जाती है, तो 2 गुना शुल्क वसूला जाता है।
अनुबंध से कम उपयोग: यदि उपयोग अनुबंध के 80% से कम होता है, तो ‘अनुपयोगी मांग’ (Unused Demand) के लिए 375 रुपये प्रति केवीए की दर से भुगतान करना पड़ता है।
निकायों ने न तो लोड बढ़वाया और न ही कम करवाया, जिसके चलते जनता का पैसा पेनल्टी भरने में चला गया।
इन बड़े शहरों में मिली सबसे ज्यादा गड़बड़ी
एनर्जी ऑडिट में जिन 22 निकायों में यह खेल पकड़ा गया है, उनमें प्रदेश के लगभग सभी बड़े शहर शामिल हैं:
नगर निगम: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, भिलाई, रायगढ़, राजनांदगांव, अंबिकापुर, बिरगांव, चिरमिरी, धमतरी और जगदलपुर।
नगर पालिका व पंचायत: कांकेर, महासमुंद, अमलेश्वर, बलौदाबाजार, दल्लीराजहरा, गोबरा नवापारा, डोंगरगढ़, मनेन्द्रगढ़, पाटन और उतई।
अब क्या होगा? (Corrective Actions)
20 करोड़ की इस चपत के बाद राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) एक्शन मोड में है। सूडा ने सभी संबंधित निकायों को निर्देश दिया है कि एनर्जी बिल ऑडिट राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़: एनर्जी ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा, 22 शहरों ने फूंके 20 करोड़ रुपये; अनुबंध से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
सभी निकायों को अपने हाईटेंशन कनेक्शन के विद्युत भार (Load) में तुरंत परिवर्तन करना होगा।
इसके लिए सीएसपीडीसीएल (CSPDCL) के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
ऑडिट संस्था द्वारा दिए गए सुझावों को लागू कर भविष्य में वित्तीय बचत सुनिश्चित करनी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते विद्युत भार में सुधार कर लिया जाता, तो विकास कार्यों में लगने वाली यह भारी-भरकम राशि बचाई जा सकती थी।



















