अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साझा किए जीवन के संघर्ष और नारी शक्ति के गौरव की गाथा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साझा किए जीवन के संघर्ष और नारी शक्ति के गौरव की गाथा, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के गरिमामयी अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य की महिला पत्रकारों के साथ एक आत्मीय संवाद किया। इस विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा, पारिवारिक संघर्ष और प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी संकल्पों पर विस्तार से चर्चा की। रायपुर में आयोजित इस चर्चा में चार महिला पत्रकारों ने उनके जीवन के अनछुए पहलुओं और छत्तीसगढ़ के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे।
संघर्ष के दिनों की याद: “माँ की तपस्या ने बनाया मुख्यमंत्री”
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: साक्षात्कार की शुरुआत मुख्यमंत्री के बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि से हुई। जब उनसे पूछा गया कि उनकी सफलता के पीछे किस महिला का हाथ है, तो उन्होंने भावुक होकर अपनी माता जी को याद किया। मुख्यमंत्री ने बताया, “जब मैं मात्र 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का देहांत हो गया। चार भाइयों में सबसे बड़ा होने के नाते चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन मेरी माँ ने पिता और माता, दोनों की जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं। आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, वह उनकी मेहनत, संस्कार और तपस्या का ही फल है।”
राजनीति और परिवार के बीच संतुलन: पत्नी का अटूट सहयोग
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: आदिवासी संस्कृति की मातृसत्तात्मक परंपरा और पारिवारिक जीवन पर बात करते हुए सीएम साय ने अपनी धर्मपत्नी के योगदान को सराहा। उन्होंने बताया कि 26 वर्ष की अल्पायु में विधायक बनने के बाद सार्वजनिक जीवन की व्यस्तता बढ़ गई थी। ऐसे में उनकी पत्नी ने न केवल घर संभाला, बल्कि बच्चों की परवरिश और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाया, जिससे वे निश्चिंत होकर जनसेवा कर सके।
बस्तर का बदलता स्वरूप: नक्सलवाद से मुक्ति और विकास की नई राह
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘नियद नेल्लानार योजना’ (आपका अच्छा गांव) का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ रहा है। हम बस्तर के अंदरूनी इलाकों तक बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचा रहे हैं।” उन्होंने आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों के पुनर्वास और उनके लोकतंत्र के प्रति बढ़ते विश्वास को प्रदेश की बड़ी उपलब्धि बताया।
महिला सशक्तिकरण: महतारी वंदन से लखपति दीदी तक का सफर
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की हर योजना के केंद्र में महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, “जब महिला आर्थिक रूप से सक्षम होती है, तो पूरा परिवार मजबूत होता है।”
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महतारी वंदन योजना: इस योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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लखपति दीदी योजना: प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, और सरकार का लक्ष्य इस आंकड़े को 10 लाख तक ले जाने का है।
प्रेरणा और विजन: विकसित छत्तीसगढ़ 2047
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: अपनी राजनीतिक प्रेरणा के बारे में बात करते हुए उन्होंने सुषमा स्वराज और राजमाता विजयाराजे सिंधिया जैसी दिग्गज महिला नेताओं का नाम लिया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की जनसेवा की भावना हमेशा प्रेरणादायी रही है। अंत में, मुख्यमंत्री ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के अपने विजन को साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार 10 प्रमुख मिशनों पर काम कर रही है ताकि 2047 तक छत्तीसगढ़ भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभा सके।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस साक्षात्कार ने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती हकीकत है। सरकार की योजनाओं और मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने राज्य की ‘मातृशक्ति’ के लिए नए द्वार खोल दिए हैं।









