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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या अब ‘बाबर’ के नाम पर नहीं बनेगी मस्जिद? याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या अब ‘बाबर’ के नाम पर नहीं बनेगी मस्जिद? याचिका पर सुनवाई से इनकार, अयोध्या से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी हलचल में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘बाबर’ या ‘बाबरी’ के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगाने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस रुख से अब इस विवाद पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

क्या था पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:अयोध्या के निवासी देवकीनंदन पांडे ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि देश के किसी भी हिस्से में बाबर या बाबरी के नाम से मस्जिद या किसी भी धार्मिक इमारत के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बन रही एक इमारत का उदाहरण दिया था, जिसे बाबरी मस्जिद का नाम दिया जा रहा था।

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याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में निम्नलिखित तर्क रखे थे:

  1. विदेशी आक्रांता का नाम: बाबर एक विदेशी आक्रमणकारी था, जिसने देश की संस्कृति और लोगों पर अत्याचार किए।

  2. सांप्रदायिक सौहार्द: याचिका में दावा किया गया कि ऐसे नामों से धार्मिक इमारतों का निर्माण होने से समाज में तनाव बढ़ सकता है और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका है।

  3. सरकारी दिशा-निर्देश: मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे ऐसे नामों के उपयोग पर प्रशासनिक रोक लगाएं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्णय

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ में हुई। याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने या सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह संकेत दिया कि न्यायिक स्तर पर इस प्रकार के प्रतिबंधों का कोई आधार नहीं पाया गया।

भविष्य पर प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि किसी धार्मिक स्थल का नाम क्या रखा जाए, इस पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं लगाई जा रही है। इस निर्णय को देश की न्यायपालिका द्वारा व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

Pooja Chandrakar

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