विवादित भूखंड पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के जियामऊ स्थित विवादित भूखंड पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। इस भूखंड पर गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने स्वामित्व का दावा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की धीमी प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे चिंताजनक बताया। इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने कहा कि कुछ हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता है। उन्होंने यह टिप्पणी अब्बास अंसारी की याचिका पर की, जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने में अत्यधिक देरी की। इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जानें पूरा मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामला बार-बार सूचीबद्ध
अब्बास अंसारी के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट को मामले पर जल्दी सुनवाई करने का निर्देश देने के बावजूद, अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जानें पूरा मामला
विवादित भूखंड का इतिहास
- अब्बास अंसारी ने दावा किया कि यह भूखंड उनके दादा द्वारा खरीदा गया था और 2004 में पंजीकृत किया गया था।
- 2017 में, इस संपत्ति को उनकी मां राबिया बेगम ने वसीयत के माध्यम से अब्बास और उनके भाई को सौंपा।
- 2020 में, एसडीएम डालीबाग ने एकतरफा आदेश जारी कर इस भूखंड को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया।
- अगस्त 2023 में, याचिकाकर्ताओं को इस भूखंड से बेदखल कर दिया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस मामले की जल्द सुनवाई की जाए। इसके साथ ही, अदालत ने अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं को निर्माण स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जानें पूरा मामला