LIVE UPDATE
शिक्षा

परीक्षा या मज़ाक? Balod में 5वीं-8वीं के छात्रों के साथ ‘खेल’, घटिया पेपर देख भड़के शिक्षक!

Balod Education News: परीक्षा या मज़ाक? छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. शिक्षा विभाग (Education Department) कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न पर आयोजित तो कर रहा है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. छात्रों को दिए गए Question-cum-Answer Booklets की क्वालिटी इतनी खराब है कि अब शिक्षक संगठन भी इसके विरोध में उतर आए हैं.

‘एक तरफ लिखो, दूसरी तरफ पढ़ो’ – Quality पर उठे सवाल

परीक्षा या मज़ाक? इस साल 5वीं और 8वीं की परीक्षा के लिए जो उत्तर पुस्तिकाएं (Answer Sheets) दी गई हैं, उनकी क्वालिटी बहुत ‘स्तरहीन’ (low grade) बताई जा रही है.

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!
  • Ink Bleeding Issue: पेपर इतना पतला है कि एक तरफ लिखने पर स्याही (ink) दूसरी तरफ छप रही है. इससे छात्रों को दूसरे प्रश्न पढ़ने और उत्तर लिखने में भारी दिक्कत हो रही है.

  • Tearing Issue: कई छात्रों ने शिकायत की कि लिखते समय ही कॉपियां फट रही हैं.

Maths Paper में रफ कार्य के लिए जगह ही नहीं!

परीक्षा या मज़ाक? सबसे बड़ी परेशानी गणित (Mathematics) के पेपर में देखने को मिली. नियमानुसार मैथ्स के पेपर में Rough Work के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, लेकिन बालोद के छात्रों को इसके लिए तरसना पड़ा.

  • छात्रों के पास Calculation करने के लिए जगह नहीं थी.

  • सिस्टमैटिक तरीके से सवाल हल करना नामुमकिन हो गया.

  • शिक्षक संघ ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ ‘नाइंसाफी’ करार दिया है.

शिक्षक संघ ने सरकार को घेरा: “सिस्टम फेल है”

परीक्षा या मज़ाक? शालेय शिक्षक संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी जिेंद्र शर्मा ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि:

  1. Blue Print की अनदेखी: प्रश्न पत्र निर्माण में ब्लू प्रिंट का पालन नहीं किया गया है.

  2. Confusing Names: परीक्षा को कभी ‘केंद्रीकृत प्राथमिक परीक्षा’ तो कभी ‘पात्रता परीक्षा’ जैसे अलग-अलग नामों से पुकारा जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति है.

  3. Missing Sign Columns: उत्तर पुस्तिकाओं में पर्यवेक्षक (Supervisor) के हस्ताक्षर के लिए भी जगह नहीं छोड़ी गई है.

DEO की चुप्पी और गुणवत्ता पर सवाल

परीक्षा या मज़ाक? हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर अव्यवस्था पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मधुलिका तिवारी ने अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है. मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता वर्ष (Education Quality Year) के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च करने वाला विभाग आखिर बुनियादी सुविधाएं देने में क्यों फेल साबित हो रहा है?

शिक्षक संघ की मांग: इस गुणवत्ताविहीन पेपर की जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त जानकारी और शिक्षक संगठनों के बयानों पर आधारित है. हमारा उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए धरातल की समस्याओं को उजागर करना है.

Dr. Tarachand Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE