
? मेकाहारा अस्पताल की हालत चिंताजनक: करोड़ों की मशीनें बंद, दर्जनों मरीज छोड़कर भागे
⚠️ इलाज के नाम पर इंतजार, नतीजा—133 मरीज बिना बताए हॉस्पिटल छोड़ गए
मेकाहारा अस्पताल की हालत चिंताजनक: करोड़ों की मशीनें बंद, छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल मेकाहारा (Raipur Medical College) में हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। जून 2025 के महीने में ही यहां 133 मरीज इलाज अधूरा छोड़कर चले गए, वहीं 46 मरीजों ने LAMA (Leave Against Medical Advice) ले लिया। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि 52 मरीजों की मौत इमरजेंसी में ही हो गई।
? 90 करोड़ की मशीनें एक्सपायर, इलाज भगवान भरोसे
अस्पताल में CT स्कैन, MRI और X-ray जैसी करीब 90 करोड़ की मशीनें या तो एक्सपायर हो चुकी हैं या खराब पड़ी हैं। इनमें से कुछ मशीनें तो पिछले 2 साल से बंद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 11 मशीनों में से 7 एक्सपायर, 3 बंद और 1 कंडम हो चुकी है।मेकाहारा अस्पताल की हालत चिंताजनक: करोड़ों की मशीनें बंद
? CT इंजेक्टर जैसी महत्वपूर्ण मशीन एक साल से अधिक समय से खराब है।
? संसाधनों की कमी से टूट रहा है मरीजों का भरोसा

अस्पताल हर महीने करीब 3,500 से ज्यादा मरीजों को इमरजेंसी में हैंडल करता है, लेकिन मशीनों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यही वजह है कि अब मरीजों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य तंत्र से उठने लगा है।मेकाहारा अस्पताल की हालत चिंताजनक: करोड़ों की मशीनें बंद
? डॉक्टर का पक्ष: “हम डिमांड भेजते हैं, प्रक्रिया लंबी है”
हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा,
“हमने बार-बार शासन को मशीनों की डिमांड भेजी है। लेकिन अप्रूवल, एस्टीमेट, टेंडर और मेंटेनेंस की प्रक्रिया में समय लगता है। कोई भी मरीज इलाज के अभाव में नहीं गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने नई CT स्कैन और MRI मशीन के लिए बजट स्वीकृत कर दिया है और टेंडर प्रक्रिया जारी है।v
? क्यों छोड़ देते हैं मरीज अस्पताल?
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इलाज में देरी
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मशीनों की खराबी
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जांच न हो पाना
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सुविधाओं की कमी
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गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल का सहारा
हाल ही में दिवंगत कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे भी इसी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे, लेकिन CT इंजेक्टर खराब होने के कारण उनकी जांच नहीं हो सकी।मेकाहारा अस्पताल की हालत चिंताजनक: करोड़ों की मशीनें बंद
? बजट की हकीकत: मांगे 200 करोड़, मिले 94.5 करोड़
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MRI 3 टेसला मशीन के लिए मांगे गए थे 28.5 करोड़, मिले सिर्फ 15 करोड़
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CT स्कैन 256 स्लाइस के लिए मांगे थे 26 करोड़, स्वीकृति मिली सिर्फ 14 करोड़
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रोबोटिक सर्जरी मशीन की जरूरत कैंसर सर्जरी विभाग को थी, लेकिन दे दी गई जनरल सर्जरी को
? 52 मौतें क्या बताती हैं?

डॉ. सोनकर के मुताबिक,
“हमारे पास गंभीर कंडीशन में मरीज आते हैं, जिन्हें हम मना नहीं करते। कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है। ऐसे केस में डेथ काउंट बढ़ता है, लेकिन इसे लापरवाही नहीं कह सकते।”
सवालों के घेरे में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की हालत देखकर ये सवाल उठता है:
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क्या सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ कागज़ों पर ठीक हैं?
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क्या करोड़ों की मशीनें सिर्फ डस्टबिन में फेंकने के लिए खरीदी जाती हैं?
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मरीज अगर सरकारी अस्पताल में सुरक्षित नहीं हैं, तो जाएं कहां?









