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यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार, 106 गोलियों से छलनी किया था दुश्मन का सीना

यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार, 106 गोलियों से छलनी किया था दुश्मन का सीना. नब्बे का दशक… उत्तर प्रदेश की फिजाओं में बारूद की गंध और जुबान पर सिर्फ एक नाम— श्रीप्रकाश शुक्ला। यह कहानी किसी फिल्मी विलेन की नहीं, बल्कि उस नौजवान की है जिसने अपनी बहन की बेइज्जती का बदला लेने के लिए कलम छोड़कर बंदूक उठा ली और फिर जुर्म की दुनिया का ऐसा बेताज बादशाह बना, जिसके खौफ से सरकारें तक हिल गईं।

बहन के आंसू और भाई का इंतकाम
साल 1993 का वह दिन, जब गोरखपुर के एक साधारण शिक्षक के घर कोहराम मच गया। घर की 16 साल की बेटी स्कूल से लौट रही थी, तभी राकेश तिवारी नाम के एक शोहदे ने उसका रास्ता रोक लिया और छेड़खानी की। रोते हुए घर पहुंची बेटी ने जब पिता को आपबीती सुनाई, तो पिता पुलिस के पास जाने की तैयारी करने लगे।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

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लेकिन, दूसरे कमरे में मौजूद 20 साल के भाई श्रीप्रकाश का खून खौल उठा। उसे कानून पर नहीं, अपनी बंदूक पर भरोसा था। वह सीधा राकेश तिवारी के पास पहुंचा। न कोई सवाल, न कोई जवाब… उसने दिनदहाड़े राकेश के सीने में गोलियां उतार दीं। यह श्रीप्रकाश शुक्ला का पहला मर्डर था, जिसने एक पहलवान को गैंगस्टर बना दिया।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

विधायक की हत्या और पूर्वांचल में दहशत
राकेश तिवारी की हत्या के बाद श्रीप्रकाश को पता चला कि राकेश बाहुबली हरिशंकर तिवारी का विरोधी और विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही का करीबी था। अपराध की दुनिया में अपना सिक्का जमाना था, तो बड़ी मछली का शिकार करना जरूरी था। शुक्ला ने विधायक वीरेंद्र शाही को निशाने पर लिया। पहला वार खाली गया, लेकिन श्रीप्रकाश रुकने वाला नहीं था। 31 मार्च 1997 को लखनऊ के इंदिरा नगर में उसने वीरेंद्र शाही को घेर लिया और मौत के घाट उतार दिया। इस हत्या ने उसे पूर्वांचल का नया ‘बाहुबली’ बना दिया।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

होटल का वो कमरा और एके-47 की गूंज
श्रीप्रकाश शुक्ला की दरिंदगी का सबसे खौफनाक चेहरा 1 जुलाई 1997 को लखनऊ में दिखा। हुसैनगंज के होटल दिलीप का कमरा नंबर 102। श्रीप्रकाश अपने साथियों के साथ एके-47 लेकर दाखिल हुआ। सामने ठेकेदार भानू प्रकाश मिश्रा थे।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

शुक्ला ने ट्रिगर दबाया और तब तक नहीं छोड़ा जब तक मैगजीन खाली नहीं हो गई। एके-47 से 94 गोलियां दागने के बाद भी उसका मन नहीं भरा, तो उसने पिस्टल से 12 और गोलियां चलाईं। कुल 106 गोलियां। कमरे का फर्श, दीवारें और बाथरूम का दरवाजा सब छलनी हो चुका था।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

जब CM की सुपारी ने बदल दिया इतिहास
श्रीप्रकाश का दुस्साहस इतना बढ़ गया कि खबरें उड़ने लगीं कि उसने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले ली है। यह खबर आग की तरह फैली। सरकार समझ गई कि सामान्य पुलिस के बस की बात नहीं है। नतीजतन, 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के सबसे तेज-तर्रार 50 जवानों को चुनकर एक नई फोर्स बनाई गई— STF (स्पेशल टास्क फोर्स)। इसका सिर्फ एक मकसद था: श्रीप्रकाश शुक्ला का खात्मा।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

तांत्रिक की सलाह: ‘101 नरबलि पूरी करो’
पुलिस और एसटीएफ के बढ़ते दबाव से बचने के लिए श्रीप्रकाश दिल्ली भाग गया। वहां वह एक वीआईपी इलाके में छिपा था। मोबाइल सर्विलांस के डर से वह और उसके साथी मीलों दूर जाकर पीसीओ या चलते रास्तों से फोन करते थे।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

कहा जाता है कि जब श्रीप्रकाश बहुत परेशान होता था, तो वह कलकत्ता के एक तांत्रिक से सलाह लेता था। एसटीएफ के पूर्व अधिकारी राजेश पांडेय के संस्मरणों के मुताबिक, एक बार घबराए हुए शुक्ला ने तांत्रिक को फोन किया। तांत्रिक ने उसे खौफनाक सलाह दी— “कामाख्या देवी के चरणों में 101 नरबलि का आंकड़ा पूरा करो, फिर तुम अजेय हो जाओगे।”यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

अंधविश्वास में डूबे श्रीप्रकाश ने अपने साथियों से कहा कि अब वे हिसाब लगाएंगे कि कितने मर्डर हो चुके हैं और 101 का आंकड़ा पूरा करने के लिए कितनों को और मारना होगा।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

द एंड: 86 हत्याओं के बाद एसटीएफ से सामना
तांत्रिक का टोटका काम नहीं आया। एसटीएफ, जो साये की तरह उसका पीछा कर रही थी, आखिरकार उस तक पहुंच गई। गाजियाबाद में हुए एक ऐतिहासिक एनकाउंटर में श्रीप्रकाश शुक्ला अपने साथियों के साथ मारा गया।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

कहा जाता है कि मरने से पहले यह कुख्यात गैंगस्टर करीब 86-87 लोगों की हत्या कर चुका था। उसकी मौत की खबर जब विधानसभा में सीएम कल्याण सिंह ने दी, तो पूरे सदन में सन्नाटा पसर गया था। वह अपराधी, जिसने 90 के दशक में दहशत का दूसरा नाम गढ़ दिया था, अब इतिहास बन चुका था।यूपी का वो ‘डॉन’ जिसने CM की सुपारी लेकर हिला दी थी सरकार

Dr. Tarachand Chandrakar

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