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डिब्बे में बंद हो गई थी फिल्म, unpaid टेक्निशियन ने बनाया अवॉर्ड विनर, जानें ‘बालीफूल’ की अद्भुत कहानी

डिब्बे में बंद हो गई थी फिल्म, unpaid टेक्निशियन ने बनाया अवॉर्ड विनर, जानें ‘बालीफूल’ की अद्भुत कहानी, छत्तीसगढ़ी सिनेमा (Chhollywood) से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो खुद किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक फिल्म जिसे बीच में ही बंद कर दिया गया था, उसे एक टेक्निशियन ने अपनी लगन से न सिर्फ पूरा किया, बल्कि रिलीज से पहले ही उसे 15 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों का विजेता बना दिया। यह कहानी है छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘बालीफूल: वेलकम टू बस्तर’ की।

जब बंद हो गई थी ‘बालीफूल’ की शूटिंग

यह किस्सा किसी फिल्म की कहानी जैसा ही है। साल 2021 में ‘बालीफूल’ फिल्म का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन निर्देशक के गैर-पेशेवर रवैये के कारण फिल्म की शूटिंग बीच में ही रोकनी पड़ी। पूरी इंडस्ट्री में यह बात फैल गई कि फिल्म अब डिब्बे में बंद हो चुकी है और कभी रिलीज नहीं होगी। इस फिल्म में तकनीकी काम देख रहे डॉ. पुनीत सोनकर का भी मेहनताना फंसा हुआ था।

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एक शर्त ने बदली किस्मत, अवॉर्ड्स की लगी झड़ी

जब फिल्म के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया, तब डॉ. पुनीत सोनकर ने एक साहसिक कदम उठाया। उन्होंने फिल्म के निर्माता अजय अग्रवाल से कहा, “आप मुझे मेरे काम के पैसे मत दीजिए, बस इस फिल्म को पूरा करने का अधिकार और निर्देशन का श्रेय मुझे दे दीजिए, क्योंकि इसकी कहानी बहुत दमदार है।” निर्माता की सहमति मिलने के बाद, सोनकर ने अपनी मेहनत से 12 दिनों की अतिरिक्त शूटिंग की और फिल्म को पूरा किया। उनकी यह लगन रंग लाई और फिल्म ने रिलीज से पहले ही विभिन्न फिल्म समारोहों में 15 अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया।

बस्तर के अनछुए पहलुओं को दिखाती है ‘बालीफूल’

बालीफूल: वेलकम टू बस्तर

2 घंटे 11 मिनट की यह फिल्म बस्तर के उस अनछुए पहलू को दिखाती है, जहां शासन-प्रशासन और नक्सलियों के बीच का अंतर्द्वंद्व है। फिल्म की कहानी बस्तर की प्रसिद्ध ‘घोटुल परंपरा’ में पनपने वाले एक मासूम प्यार से शुरू होती है और नक्सलवाद के राजनीतिकरण के खात्मे तक का सफर तय करती है। यह फिल्म 4 साल के लंबे इंतजार के बाद 18 अक्टूबर 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

पुरस्कारों की एक लंबी फेहरिस्त

इस फिल्म की सफलता का सफर अयोध्या फिल्म फेस्टिवल से शुरू हुआ, जहां इसे ‘बेस्ट रीजनल फिल्म’ का अवॉर्ड मिला। इस जीत ने टीम का हौसला बढ़ाया और फिर तो जैसे अवॉर्ड्स की झड़ी लग गई। फिल्म ने अब तक जीते कुछ प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:

  • बेस्ट रीजनल फिल्म: अयोध्या फिल्म फेस्टिवल, एवरेस्ट इंटरनेशनल फेस्टिवल

  • बेस्ट फीचर फिल्म: लोक सिटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (नई दिल्ली)

  • बेस्ट डायरेक्टर: सुनियत इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (मुंबई), ससकारा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल

  • बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म: कंचनजंगा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (सिलीगुड़ी)

  • बेस्ट सोशल फिल्म: कॉटन सिटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल

इनके अलावा, कासिफ चंबल, प्राइम इंटरनेशनल और कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी ‘बालीफूल’ को सम्मानित किया गया है।

Dr. Tarachand Chandrakar

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