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छत्तीसगढ़ की ‘काशी’ का वो रहस्यमयी शिवलिंग, जिसमें हैं सवा लाख छेद! जानें क्यों है इतना चमत्कारी और क्या है इसका इतिहास

छत्तीसगढ़ की ‘काशी’ का वो रहस्यमयी शिवलिंग, जिसमें हैं सवा लाख छेद! जानें क्यों है इतना चमत्कारी और क्या है इसका इतिहास

जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ की ‘काशी’, छत्तीसगढ़ के हृदय में बसी एक ऐसी भूमि है जिसे ‘प्रदेश की काशी’ के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र नगरी है खरौद, जो अपने सीने में एक अद्भुत और रहस्यमयी शिवलिंग का राज छुपाए हुए है। यहाँ स्थित एक प्राचीन मंदिर में एक ऐसा शिवलिंग स्थापित है, जिसमें एक-दो नहीं, बल्कि पूरे सवा लाख (1,25,000) छिद्र हैं। यह अनोखा शिवलिंग, जिसे ‘लक्षलिंग’ भी कहा जाता है, न केवल भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहासकारों और वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली है।

क्यों है यह ‘लक्षलिंग’ इतना अद्वितीय और रहस्यमयी?

खरौद के इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसमें मौजूद सवा लाख छिद्र हैं। यह अपने आप में दुनिया का एक अनूठा शिवलिंग है।छत्तीसगढ़ की ‘काशी’

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  • मान्यता: ऐसी मान्यता है कि इन सवा लाख छिद्रों में से हर एक का अपना एक अलग महत्व है। कुछ का मानना है कि इन छिद्रों के माध्यम से जो भी जल या दूध अर्पित किया जाता है, वह सीधे पाताल लोक तक पहुंचता है।

  • आस्था: भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इन छिद्रों वाले शिवलिंग (लक्षलिंग) के दर्शन मात्र से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है और पूरा वातावरण “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है।

क्या है इसका पौराणिक इतिहास और मान्यताएं?

इस मंदिर और शिवलिंग का इतिहास सदियों पुराना है, जो इसे और भी खास बनाता है।छत्तीसगढ़ की ‘काशी’

  • कलचुरी कालीन धरोहर: इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण कलचुरी शासनकाल के दौरान हुआ था, जो इसे एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल बनाता है।

  • लोककथा: एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, इस क्षेत्र में कभी 108 शिव मंदिरों का निर्माण कराया गया था, जिनमें से कई आज भी मौजूद हैं। खरौद उन्हीं में से एक प्रमुख केंद्र था।

खरौद: सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि मंदिरों का नगर

‘छत्तीसगढ़ की काशी’ का दर्जा खरौद को सिर्फ एक शिवलिंग के कारण नहीं मिला है। यह पूरा नगर प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध है।छत्तीसगढ़ की ‘काशी’

  • लक्ष्मणेश्वर मंदिर: यह खरौद का एक और प्रमुख और बेहद प्राचीन मंदिर है। इसकी दीवारों पर की गई अद्भुत नक्काशी और स्थापत्य कला कलचुरी युग की कलात्मक उत्कृष्टता का बेजोड़ नमूना है।

  • भुवनेश्वर महादेव मंदिर: यह भी एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो अपनी स्थापत्य शैली और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।

  • शिवगंगा कुंड: मंदिर परिसर के पास स्थित यह एक पवित्र कुंड है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसका जल कभी नहीं सूखता। श्रद्धालु यहां स्नान करना पुण्य का काम मानते हैं।

आज यह स्थान छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक पर्यटन सर्किट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, कला और अध्यात्म का एक ऐसा जीवंत संगम है, जो हर किसी को अपनी ओर खींचता है।छत्तीसगढ़ की ‘काशी’

Nidar Chhattisgarh Desk

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